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उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जिले में महापरीक्षा का सफल आयोजन, हजारों शिक्षार्थियों ने लिया भाग

जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत रविवार, 22 मार्च 2026 को राज्यव्यापी बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान मूल्यांकन परीक्षा (FLNAT) का भव्य आयोजन किया गया। इस महापरीक्षा ने यह साबित कर दिया कि सीखने और पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती, बल्कि इच्छाशक्ति और संकल्प ही असली ताकत है।

यह आयोजन कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन में, मुख्य कार्यपालन अधिकारी गोकुल रावटे के मार्गदर्शन तथा जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

जिलेभर में बने 440 परीक्षा केंद्र

महापरीक्षा अभियान के तहत जिले के सभी ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकायों के स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया। कुल 440 परीक्षा केंद्रों में समान संख्या में केंद्राध्यक्ष एवं पर्यवेक्षक तैनात किए गए। परीक्षा सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी सुविधा अनुसार शामिल होकर परीक्षा दी।

24 हजार से अधिक शिक्षार्थियों की भागीदारी

इस अभियान में 200 घंटे का अध्ययन पूरा करने वाले कुल 24,376 शिक्षार्थियों ने भाग लिया, जिनमें

17,112 महिलाएं

7,264 पुरुष शामिल रहे।

महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी ने इस अभियान को और अधिक प्रेरणादायक बना दिया। यह स्पष्ट संकेत है कि महिलाएं अब शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

शिक्षा बना उत्सव, आत्मनिर्भरता की ओर कदम

महापरीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि पूरे जिले में शिक्षा का उत्सव बन गई। इस अभियान ने न केवल साक्षरता के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि समाज के हर वर्ग को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित किया।

शिक्षार्थियों का उत्साह यह दर्शाता है कि उम्र किसी भी प्रकार की बाधा नहीं है, यदि सीखने की इच्छा प्रबल हो।

अधिकारियों ने किया परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण

जिला स्तर की टीम ने विभिन्न विकासखंडों में पहुंचकर परीक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस टीम में जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा, जिला मिशन समन्वयक हरिराम जायसवाल, जिला परियोजना अधिकारी विजया सिंह राठौर एवं डाइट प्राचार्य बी. पी. साहू शामिल रहे।

टीम ने बम्हनीडीह, अकलतरा, नवागढ़ और बलौदा विकासखंड के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया, जहां शिक्षार्थियों का उत्साह देखने लायक था।

शिक्षार्थियों ने साझा किया अनुभव

परीक्षा में शामिल शिक्षार्थियों ने बताया कि स्वयंसेवी शिक्षकों द्वारा उन्हें “उल्लास प्रवेशिका” के माध्यम से पढ़ाया गया, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में शामिल हो सके। कई शिक्षार्थियों ने कहा कि परीक्षा देने के बाद उन्हें गर्व और खुशी का अनुभव हो रहा है।

निष्कर्ष:

यह महापरीक्षा अभियान जिले में शिक्षा के प्रति जागरूकता और समर्पण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। इस पहल ने यह साबित कर दिया कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो समाज का हर व्यक्ति शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकता है और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी निभा सकता है।


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