श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय में अनुशासन, संस्कार और सपनों की नई उड़ान से सजा दीक्षारंभ समारोह
मुख्य अतिथि शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, रायगढ़ के कुलपति डॉ. विनय चौहान हुए शामिल
हास्य कवि सम्मेलन में देश के ख्यातिलब्ध कवियों ने बांधा समां, छत्तीसगढ़ी व राजस्थानी लोकनृत्य ने मोहा मन

बनाहिल। ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और नई उम्मीदों के उल्लास से श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय, बनाहिल का परिसर उस समय जीवंत हो उठा, जब नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के स्वागत में भव्य दीक्षारंभ समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में विद्यार्थियों के चेहरों पर नई शुरुआत की खुशी और भविष्य को लेकर उत्साह साफ दिखाई दिया। कार्यक्रम ने शिक्षा, संस्कार, संस्कृति और मनोरंजन का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जो विद्यार्थियों के लिए लंबे समय तक यादगार बना रहेगा।
समारोह के मुख्य अतिथि शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, रायगढ़ के कुलपति डॉ. विनय चौहान रहे। वहीं अकलतरा विधानसभा के विधायक राघवेंद्र सिंह, शासकीय टी.सी.एल. स्नातकोत्तर महाविद्यालय जांजगीर के प्राचार्य डॉ. डी.आर. लहरे, अकलतरा एसडीएम सुमित बघेल, ऋषभ शिक्षण संस्थान के संस्थापक डॉ. जयकुमार जैन तथा महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शिखा सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का तिलक एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। इसके पश्चात महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शिखा सिंह ने महाविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, गौरवपूर्ण परिचय और विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देते हुए वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
“अनुशासन ही विद्यार्थी जीवन की सबसे बड़ी पूंजी”
मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. विनय चौहान ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए नई शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न प्रावधानों और बदलते शैक्षणिक परिवेश पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर पूरी निष्ठा, लगन और निरंतर मेहनत के साथ उसे हासिल करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में अनुशासन सफलता की सबसे मजबूत नींव है। अनुशासित विद्यार्थी ही अपने समय, प्रतिभा और ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग कर जीवन में ऊंचाइयां हासिल कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान करने तथा सकारात्मक सोच के साथ निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
विधायक राघवेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को अकलतरा क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराते हुए लक्ष्य के प्रति समर्पण और अनुशासन के महत्व पर विचार रखे। डॉ. डी.आर. लहरे ने नई शिक्षा नीति 2020 के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी, जबकि एसडीएम सुमित बघेल ने प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए निरंतर परिश्रम, धैर्य और सकारात्मक सोच को सफलता का मूलमंत्र बताया।
मेधावी विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों का सम्मान
समारोह का सबसे गौरवपूर्ण क्षण उस समय आया, जब विश्वविद्यालय की प्रावीण्य सूची में उत्कृष्ट स्थान हासिल कर महाविद्यालय का नाम रोशन करने वाली मेधावी छात्राओं समरीन, कु. शालू एवं हिमालय को मंच पर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करते ही पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
इसी क्रम में समाजसेवा एवं राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों एवं कार्यक्रम अधिकारी को भी प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
लोकनृत्य ने बिखेरी छत्तीसगढ़ी और राजस्थानी संस्कृति की रंगत
दीक्षारंभ समारोह में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और माटी की खुशबू को जीवंत कर दिया। एनएसएस स्वयंसेविकाओं एवं छात्राओं द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य ने खूब तालियां बटोरीं। इसके साथ ही राजस्थानी संस्कृति पर आधारित रंगारंग लोकनृत्य ने कार्यक्रम में चार-चांद लगा दिए। छात्राओं की भावपूर्ण और ऊर्जावान प्रस्तुतियों की अतिथियों ने मुक्त कंठ से सराहना की।

हास्य कवियों ने गुदगुदाया, देर तक गूंजती रही तालियों की आवाज
समारोह के द्वितीय सत्र में नवप्रवेशी विद्यार्थियों के स्वागत को और भी यादगार बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिप्राप्त हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। देश के प्रतिष्ठित कवि एकाग्र शर्मा, बंसीधर मिश्रा, सोनल जैन, हीरामणि वैष्णव और मयंक शर्मा ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।

कवियों ने हास्य, ओज और वीर रस से परिपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से ऐसा समां बांधा कि पूरा सभागार ठहाकों और तालियों से गूंजता रहा। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और माटी की महक की सुंदर झलक भी देखने को मिली। हास्य कवि सम्मेलन ने विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ मनोरंजन और प्रेरणा का अनूठा अनुभव प्रदान किया।


कार्यक्रम के समापन अवसर पर आमंत्रित अतिथियों का शॉल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी मंच संचालन राहुल राठौर ने किया।
इस अवसर पर डॉ. सुनील दीक्षित, डॉ. विश्वास विश्वकर्मा, डॉ. राकेश सोनी, यशपाल चौबे, सौरभ जैन, अम्बरीश सिंह बैस, राजकुमार साहू, हिमांशु साहू, शैलेंद्र श्रीवास, निकेत जैन, वीरेंद्र चौधरी, पीयूषकांत चतुर्वेदी, विष्णु पटेल, चुन्नू, दुर्गा टण्डन, अनुज जैन, अरविंद कुमार, कमलकांत साहू, संध्या सिंह, सरिता पटेल, चंद्ररुपा कश्यप, संदीप कुर्रे, अशोक पाण्डेय, आनमिका सिंह, सुनीता पाण्डेय, पायल दास, रश्मि मरकाम, समरीन मिर्जा, राजेश भास्कर कश्यप, विद्या जायसवाल, अविनाश चौहान, नरेंद्र पाटले, मनीष गंधर्व, आकाश दास, नीरज निर्मलकर, बृजनंदन पटेल, द्वाशराम कश्यप सहित राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक, एनसीसी कैडेट एवं महाविद्यालय के समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
समूचा आयोजन विद्यार्थियों के लिए नई ऊर्जा, अनुशासन, संस्कार और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश देते हुए एक यादगार शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक उत्सव बन गया।








