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पाठ्यपुस्तकों में देरी के खिलाफ निजी विद्यालय संचालकों का जिला मुख्यालय जांजगीर में जोरदार प्रदर्शन

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के आह्वान पर आज जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय में निजी विद्यालय संचालकों, शिक्षकों एवं शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने निशुल्क पाठ्यपुस्तकों के वितरण में हो रही लगातार देरी के विरोध में विशाल धरना-प्रदर्शन एवं रैली निकालकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार के माध्यम से सौंपा गया, जिसमें निजी एवं शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि 22 जून को कलेक्टर, जांजगीर-चांपा के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी गई थी कि यदि 24 जून तक निजी विद्यालयों को संकुल स्तर पर निशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण संबंधी कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। शासन स्तर से कोई सकारात्मक आदेश जारी नहीं होने के कारण आज यह आंदोलन आयोजित किया गया।

निजी विद्यालयों के साथ भेदभाव का आरोप

संघ ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों को पुस्तक वितरण के मामले में लगातार उपेक्षित किया जा रहा है। जहां एक ओर निजी विद्यालयों को अभी तक जिला मुख्यालयों में भी पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें प्रदेश के मात्र छह डिपो से पुस्तकें लेने के लिए बुलाया गया है। जांजगीर-चांपा जिले के विद्यालयों को तो 21 जुलाई को बिलासपुर के समीप स्थित डिपो से पुस्तकें लेने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों को अनावश्यक रूप से परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

संघ पदाधिकारियों ने कहा कि सत्र प्रारंभ हुए कई सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन विद्यार्थी अब भी पाठ्यपुस्तकों के अभाव में अध्ययन करने को मजबूर हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

शासकीय विद्यालयों में भी अधूरी पुस्तक आपूर्ति

संघ ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल निजी विद्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के हितों से भी जुड़ा हुआ है। पदाधिकारियों का कहना है कि 10 जून से शासकीय विद्यालयों को पुस्तकें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन आज 25 जून तक अधिकांश विद्यालयों में सभी विषयों की पुस्तकें नहीं पहुंची हैं।

बताया गया कि बारकोड स्कैनिंग प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में विद्यालयों में पुस्तकों का वितरण भी नहीं हो पाया है। वहीं आत्मानंद विद्यालयों में कक्षा 9वीं एवं 10वीं की पुस्तकें अब तक नहीं पहुंचने की शिकायत भी सामने आई है।

प्रवेश उत्सव से पहले उपलब्ध हों पुस्तकें

संघ की प्रमुख मांग है कि प्रत्येक वर्ष विद्यालयों में आयोजित होने वाले "विद्यालय प्रवेश उत्सव" से कम से कम एक माह पूर्व सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों को पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएं, ताकि सत्र के प्रथम दिन से ही विद्यार्थियों को पढ़ाई का पूरा लाभ मिल सके।

बारकोड व्यवस्था समाप्त करने की मांग

धरना-प्रदर्शन के दौरान संघ ने पाठ्यपुस्तकों में लागू बारकोड एवं स्कैनिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। संघ के नेताओं का कहना है कि यह व्यवस्था शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन पर अविश्वास को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि "बारकोड प्रणाली शिक्षकों के सम्मान के विपरीत है। सरकार को अपने शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन पर विश्वास करना चाहिए तथा इस व्यवस्था को समाप्त करना चाहिए।"

बड़ी संख्या में पहुंचे संचालक और शिक्षक

जांजगीर-चांपा जिले के लगभग 453 निजी विद्यालयों का प्रतिनिधित्व करते हुए बड़ी संख्या में संचालक, प्राचार्य एवं शिक्षक धरना स्थल पर उपस्थित रहे। प्रदर्शन के दौरान जोरदार नारेबाजी की गई तथा विद्यार्थियों के हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

धरना स्थल पर पहुंचे तहसीलदार ने संघ का ज्ञापन प्राप्त किया और आश्वासन दिया कि इसे मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा।

इन पदाधिकारियों की रही प्रमुख उपस्थिति

धरना-प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के सचिव एवं जिला अध्यक्ष मनोज पाण्डेय, सचिव आलोक शुक्ला, संरक्षक रोशन केशरवानी, उपाध्यक्ष नरेंद्र पाण्डेय, धनेश मिश्रा, कोषाध्यक्ष प्रतीक गुप्ता, सह सचिव रवि निर्मलकर, पामगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष धनंजय दिव्य, बलौदा ब्लॉक अध्यक्ष जितेंद्र सोनी, बम्हनीडीह ब्लॉक अध्यक्ष रवि शंकर चौबे, नवागढ़ ब्लॉक अध्यक्ष डी.आर. कश्यप, अकलतरा ब्लॉक अध्यक्ष अखिलेश सेंगर, मीडिया प्रभारी गणेशराम पटेल सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल

संघ ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। संघ ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही सभी विद्यालयों को समय पर एवं स्थानीय स्तर पर निशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं की गई, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

"शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक विद्यार्थी को सत्र प्रारंभ होने के साथ ही उसकी पाठ्यपुस्तक उपलब्ध हो।" इसी संदेश के साथ आज का प्रदर्शन संपन्न हुआ।


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