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अकलतरा में होली की शाम सजा साहित्य का महाकुंभ

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन शांतिपूर्ण संपन्न

अकलतरा। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा नगर में होली की शाम आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का कार्यक्रम इस वर्ष भी उत्साह, उल्लास और साहित्यिक गरिमा के साथ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। नगर के हृदय स्थल शास्त्री चौक पर आयोजित इस बहुप्रतीक्षित आयोजन में बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और बुजुर्ग उपस्थित रहे। रंगों के पर्व होली के दिन कार्यक्रम का सफल आयोजन किसी चुनौती से कम नहीं होता, किंतु आयोजन समिति एवं पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी से यह कार्यक्रम अनुकरणीय रूप से संपन्न हुआ।

यह आयोजन प्रतिवर्ष की भांति सामाजिक संस्था “पहलएक सेवा भाव” द्वारा किया गया, जो विगत कई वर्षों से होली की शाम साहित्य प्रेमियों के लिए इस सांस्कृतिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रही है। संस्था के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने आयोजन की सफलता पर सभी श्रोताओं, अतिथियों एवं पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

अकलतरा पुलिस की सराहनीय भूमिका

होली जैसे संवेदनशील पर्व पर भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है। अकलतरा पुलिस प्रशासन की सतर्कता और प्रभावी व्यवस्था के कारण कार्यक्रम शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। उपस्थित जनसमूह ने भी अनुशासन का परिचय देते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया।

ख्यातिलब्ध कवियों ने बांधा समां

कवि सम्मेलन में देश और प्रदेश के ख्यातिलब्ध कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मंच संचालन का दायित्व ओजस्वी कवि शशिकांत यादव ने संभाला। उन्होंने अपने प्रभावशाली संचालन के साथ वीर रस की कविताओं से श्रोताओं में देशभक्ति और जोश का संचार किया।

छत्तीसगढ़ी गीतकार मीर अली मीर ने अपनी प्रसिद्ध कविता “नंदाजाही का रे” की प्रस्तुति देकर समूचे पंडाल को भावविभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली रही कि उपस्थित दर्शकों सहित क्षेत्रीय विधायक राघवेन्द्र सिंह ने भी खड़े होकर तालियों से उनका अभिनंदन किया।


ख्यातिलब्ध स्थानीय हास्य कवि बंशीधर मिश्रा ने अपने चुटीले व्यंग्य और हास्य कविताओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उनकी प्रस्तुतियों पर देर तक ठहाके गूंजते रहे।

युवा कवि भरत द्विवेदी ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत छत्तीसगढ़ी गीत “नई ये सुनइया अब सियान के” से की, जिस पर तालियों की गड़गड़ाहट देर तक थमती नहीं दिखी।


इसके अलावा मयंक शर्मा, सोमप्रभा तिवारी नूर एवं राजेश उर्मिल ने भी अपनी-अपनी पारी में विविध रसों की कविताओं से श्रोताओं को बांधे रखा।

जनशैलाब ने बढ़ाया उत्साह

कवि सम्मेलन को सुनने के लिए नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्रोताओं की सहभागिता और उत्साह ने यह साबित कर दिया कि डिजिटल युग में भी साहित्य और कविता के प्रति लोगों का आकर्षण कम नहीं हुआ है। युवा वर्ग जहां ओज और देशभक्ति की कविताओं पर जोश से भर उठा, वहीं महिलाएं और बुजुर्ग हास्य-व्यंग्य पर ठहाके लगाते नजर आए।


परंपरा बन चुका है आयोजन

अकलतरा के शास्त्री चौक पर होली की शाम आयोजित होने वाला यह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन अब नगर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। “पहलएक सेवा भाव” संस्था द्वारा निरंतर किए जा रहे इस प्रयास ने साहित्य प्रेमियों के लिए एक स्थायी मंच उपलब्ध कराया है।


कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी आमंत्रित कवियों, जनप्रतिनिधियों, श्रोताओं एवं प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए अगले वर्ष और भी भव्य आयोजन का संकल्प लिया।


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