सुशासन तिहार के जनसमस्या निवारण शिविर में खनिज विभाग पर उठे सवाल
खनिज निरीक्षक RL राजपूत (रेखा लाल राजपूत) के कार्यशैली एवं भ्रामक जानकारी देने की हुई शिकायत

जांजगीर-चांपा। मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी सुशासन तिहार के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में उस समय असहज स्थिति बन गई, जब खनिज विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर खुलकर शिकायत दर्ज कराई गई। शिविर में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मंशा के विपरीत खनिज विभाग की लापरवाही और कथित अनियमितताओं ने पूरे कार्यक्रम की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए।
बताया गया कि शिविर में जहां एक ओर खनिज विकास निगम के अध्यक्ष एवं कलेक्टर जन्मेजय महोबे समय पर पहुंचकर जनसमस्याओं को सुन रहे थे, वहीं खनिज विभाग के अधिकारी निर्धारित समय से काफी देर, लगभग दोपहर 1 बजे के बाद पहुंचे। इस देरी को लेकर उपस्थित ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों में नाराजगी स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
फोन नहीं उठाने और भ्रामक जानकारी देने के आरोप
शिविर के दौरान खनिज निरीक्षक आर एल राजपूत (रेखा लाल राजपूत) के खिलाफ कई शिकायतें सामने आईं। आरोप है कि वे आम नागरिकों के फोन कॉल का जवाब नहीं देते और कार्यालय में भी सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराते। खनिज से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की कमी को लेकर शिकायतकर्ता ने नाराजगी जताई।
अवैध रेत परिवहन मामले में विरोधाभास
गौरतलब है कि हाल ही में अवैध रेत परिवहन के एक मामले में निरीक्षक आर एल राजपूत द्वारा यह जानकारी दी गई थी कि कलेक्टर के सख्त निर्देशानुसार बिना एक माह की अवधि पूरी किए किसी भी जब्त वाहन को नहीं छोड़ा जाएगा। प्रारंभिक तौर पर जिले में इस निर्देश का पालन भी होता नजर आया, लेकिन इसी बीच एक मामला दबे पांव सामने आया जिसमें एक हाइवा वाहन को मात्र एक सप्ताह के भीतर चुपके से ही छोड़ दिया गया था।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में लेन-देन की आशंका भी जताई जा रही थी, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह घटना प्रशासनिक निर्देशों और जमीनी क्रियान्वयन के बीच के अंतर को उजागर करती है।
जनता की उपेक्षा का आरोप
अवैध खनिज उत्खनन के पीड़ित लोगों का कहना है कि बार-बार संपर्क करने के बावजूद खनिज विभाग के अधिकारी उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करते हैं। लोगों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि “अधिकारी जनता के सेवक होते हैं, लेकिन यहां स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है, जहां जनता को ही नजरअंदाज किया जा रहा है।”
अध्यक्ष सौरभ सिंह ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) से शिकायत की गई। उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और कार्यप्रणाली में सुधार लाने के सख्त निर्देश दिए।
सुशासन तिहार जैसे जनकल्याणकारी अभियान का उद्देश्य प्रशासन को जनता के करीब लाना है, लेकिन खनिज विभाग की कार्यशैली इस उद्देश्य को कमजोर करती नजर आई। अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारियों की फटकार के बाद विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी स्थापित हो पाती है।








