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रास्ते के विवाद ने लिया हिंसक रूप, सरपंच पति व पुत्र पर मारपीट का मामला दर्ज

पीड़ित महिला का आरोप"रास्ता मांगने पर गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी देकर की गई मारपीट"

सूत्रों का दावापहले भी सामाजिक बहिष्कार और हुक्का-पानी बंद कर प्रताड़ित किए जाने की शिकायत पुलिस तक पहुंच चुकी थी

जांजगीर-चांपा। जिले के मुलमुला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम भलवाही (लगरा) में रास्ते के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। एक महिला की शिकायत पर पुलिस ने सरपंच पति और उनके पुत्र के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है। घटना के बाद गांव में पीड़ित परिवार पर तनाव का माहौल साफ तौर पर देखा जा सकता है।

पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार ग्राम भलवाही (लगरा) निवासी जलवंती खूंटे ने बताया कि 19 जुलाई 2026 की शाम लगभग 4 बजे वह अपने घर के बाहर बैठी थीं। इसी दौरान गौठान के पास ईंटों से घेराबंदी का कार्य चल रहा था। महिला ने सरपंच के पुत्र राणा खूंटे से अपने घर से आने-जाने के लिए थोड़ा रास्ता छोड़ने का आग्रह किया। आरोप है कि राणा खूंटे ने रास्ता देने से साफ इनकार करते हुए दूसरे रास्ते से आने-जाने की बात कही।

रिपोर्ट के अनुसार, जब महिला ने निर्माणाधीन दीवार से दो ईंटें हटाईं तो राणा खूंटे अपने पिता फागूराम खूंटे (सरपंच पति) को मौके पर लेकर पहुंचा। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों ने महिला को रास्ता नहीं देने की बात कहते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी और जान से मारने की धमकी देते हुए हाथ-मुक्कों तथा ईंट के टुकड़े से मारपीट की।

पीड़ित महिला का कहना है कि बीच-बचाव करने पहुंचे उनके पति प्रेमलाल खूंटे और देवर प्यारेलाल खूंटे के साथ भी आरोपियों ने अभद्रता और मारपीट की। घटना में महिला के दोनों हाथों तथा उनके देवर के पैर में चोटें आईं। बाद में परिजनों ने बीच-बचाव कर विवाद शांत कराया और पीड़ित पक्ष थाना मुलमुला पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 351(3), 115(2) एवं 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर दी है।

पहले भी प्रताड़ना के आरोप

इस पूरे मामले में सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि आरोपी पक्ष के द्वारा पूर्व में भी पीड़ित परिवार का गांव में कथित रूप से हुक्का-पानी बंद कर सामाजिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में पीड़ित पक्ष ने पहले भी दो बार थाना मुलमुला में शिकायत एवं सूचना दी थी। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस द्वारा नहीं की गई है और इन पहलुओं की जांच की जानी शेष है। परंतु पूर्व शिकायत की बात सही हो तो पुलिस द्वारा एहतियातन मारपीट की घटना रोकी जा सकती थी।

यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में रास्ते जैसे छोटे विवादों के गंभीर रूप लेने और सामाजिक तनाव की स्थिति को भी उजागर करती है। अब सभी की निगाहें पुलिस विवेचना और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।


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