“एक हफ्ते में ‘सेटिंग’! जांजगीर खनिज विभाग पर 40 हजार में हाइवा छोड़ने का आरोप”

जांजगीर-चांपा। जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर कार्रवाई के दावे कर रहे खनिज विभाग की कार्यप्रणाली अब गंभीर सवालों के घेरे में है। एक हाइवा वाहन को कथित रूप से नियमों को दरकिनार कर महज एक सप्ताह के भीतर राशि लेकर छोड़ देने का मामला सामने आया है, जिससे विभाग की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
नियमों से अलग कार्रवाई, उठे सवाल
जानकारी के अनुसार वाहन क्रमांक CG 11 BN 7736 (हाइवा) एक हफ्ते पहले खनिज विभाग द्वारा अवैध रेत परिवहन के आरोप में पकड़ा गया था जो खोखरा स्थित पुलिस लाइन में जप्त कर सुरक्षित रखा गया था। आमतौर पर ऐसे मामलों में वाहन को एक माह तक जप्त रखकर विधिवत चालान और जुर्माना वसूलने के बाद छोड़ा जाता है, लेकिन इस प्रकरण में आरोप है कि वाहन को करीब 40 हजार रुपए लेकर एक सप्ताह के भीतर ही छोड़ दिया गया।
कार्रवाई की आड़ में ‘खेल’?
एक ओर विभाग अवैध उत्खनन एवं परिवहन के खिलाफ सख्ती का दावा कर सुर्खियां बटोर रहा है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं विभागीय कार्रवाई पर संदेह पैदा कर रही हैं। यदि आरोप सही हैं, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचाने वाला मामला है।
खनिज निरीक्षक पर उठ रही उंगली
मामले में खनिज निरीक्षक आर.एल. राजपूत (रेखा लाल राजपूत) की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि मामले की जानकारी लेने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में अवैध उत्खनन की शिकायतों पर भी अक्सर उनकी (रेखा लाल राजपूत) ओर से गंभीरता नहीं दिखाई जाती। खनिज निरीक्षक श्री RL राजपूत की आदतों में हर मामले को हल्के में लेकर चलना, जनप्रतिनिधियों तथा पत्रकारों को इग्नोर करना उनकी फ़ितरतों में साफ देखा जा सकता है।
बरबसपुर रेत घाट बना ‘हॉटस्पॉट’
जिले के बरबसपुर रेत घाट पर अवैध उत्खनन और परिवहन की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यहां लंबे समय से नियमों की अनदेखी कर कार्य संचालित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन बने हुए हैं। बता दें कि जिले में लगातार अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन पर कार्रवाई तो हो रही है परंतु बरबसपुर रेत घाट के मामले पर कारवाई क्यों नहीं हो रही है ये सेटिंग का संदेह पैदा करता है।

सूत्रों के हवाले से बड़ा आरोप
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे प्रकरण में घूसखोरी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। जिस तेजी से वाहन छोड़ा गया और जिस प्रकार अधिकारियों का रवैया सामने आया, उसने संदेह को और गहरा कर दिया है।
जांच की उठ रही मांग
जिले के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की बात की है। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं हुई, तो अवैध खनन का नेटवर्क और मजबूत होगा।
प्रशासन की चुप्पी बरकरार
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है।

जांजगीर-चांपा जैसे खनिज संपन्न जिले में यदि नियमों को दरकिनार कर इस तरह के आरोप सामने आते हैं, तो यह शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। पारदर्शिता और जवाबदेही ही इस स्थिति से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता है।







