जांजगीर–चांपा जिले में अवैध रेत उत्खनन पर सख्ती की मांग
प्राकृतिक संसाधन बचाव समिति ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

जांजगीर–चांपा। जिले में हसदेव, महानदी और लीलागर नदी के तटों पर लगातार बढ़ रहे अवैध रेत उत्खनन को रोकने की मांग को लेकर प्राकृतिक संसाधन बचाव समिति (वनांचल क्षेत्र, अड़भार सहित) ने कलेक्टर जांजगीर–चांपा को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। समिति ने अवैध खनन, परिवहन और अवैध घाट संचालन पर रोक लगाने के साथ-साथ दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि छत्तीसगढ़ शासन एवं खनिज विभाग द्वारा निर्धारित वैध रेत घाटों को छोड़कर जिले में कई स्थानों पर अवैध तरीके से रेत निकाली जा रही है। इसके कारण नदियों का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है, पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है तथा नदी किनारे बसे गांवों में कटाव एवं दुर्घटनाओं की स्थिति बनने लगी है।

समिति ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि अवैध रेत परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने स्थानीय स्तर पर पुलिस, राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त कार्रवाई हो, साथ ही अवैध घाटों को तुरंत सील किया जाए।
ज्ञापन में जिले के 22 स्थलों की सूची भी दी गई है, जहां अवैध उत्खनन और परिवहन की आशंका जताई गई है। इनमें प्रमुख स्थान—
अकलतरा क्षेत्र के परसाही, तानसरा, नतानार, खुर्सीपारा, देवरी, रिंझा, नागपुर, कोसिर, केरेझर, सेंदरी, खरसरा, बकतरा आदि शामिल हैं।
इसके अलावा बलोदा क्षेत्र के कई गांवों और नगर पंचायत चांपा को भी सूचीबद्ध किया गया है, जहां हसदेव नदी के किनारे अवैध गतिविधियों का संदेह है।
समिति ने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो नदी तटों का क्षरण बढ़ेगा और क्षेत्र की पारिस्थितिकी को गंभीर खतरा पैदा होगा।
ज्ञापन पर सूरेंद्र लहरे, अध्यक्ष–प्राकृतिक संसाधन बचाव समिति सहित अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
कलेक्टर कार्यालय ने ज्ञापन प्राप्त कर इसकी प्रति पुलिस अधीक्षक, जिला खनिज अधिकारी और संबंधित तहसीलदारों को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दी है।
अवैध रेत उत्खनन को रोकने की इस पहल से स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि प्रशासन अब और सख्त कदम उठाकर नदियों के संरक्षण की दिशा में ठोस कार्रवाई करेगा।







