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अकलतरा थाना में अवैध रेत उत्खनन पर ताबड़तोड़ कार्रवाई, फिर ड्राइवर को लेकर उठ रहा विवाद

अकलतरा। अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अकलतरा थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 14 वाहनों को जप्त किया। इस कार्रवाई में 12 हाइवा वाहन रात में थाना पुलिस द्वारा पकड़े गए, जबकि अगले दिन दोपहर में जिला माइनिंग टीम ने 2 और वाहनों को पकड़कर थाना परिसर में लाकर खड़ा किया।

हालांकि, इस सख्त कार्रवाई के बीच एक ऐसा वाकया सामने आया जिसने पूरे घटनाक्रम पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की सच्चाई क्या है, यह तो थाना प्रभारी ही स्पष्ट कर सकते हैं, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार घटनाक्रम कुछ इस प्रकार बताया जा रहा है।

थाने से वाहन भगाने की कोशिश

जानकारी के अनुसार, वाहन क्रमांक CG 11 BS 7896 (चालक – निलेश) को माइनिंग टीम द्वारा पकड़कर थाना परिसर में लाया गया था। बताया जा रहा है कि वाहन थाने में खड़ा होने के बावजूद चालक निलेश ने कथित रूप से लापरवाहीपूर्वक वाहन को वहां से भगाने की कोशिश की।

सूत्रों के अनुसार पुलिस टीम ने तत्काल पीछा किया और करीब एक से डेढ़ किलोमीटर दूर वाहन को रुकवाया। वाहन रुकते ही चालक भागने लगा, जिसे पुलिस स्टाफ ने दौड़कर पकड़ लिया और पुनः थाने लाया गया।

लेनदेन की चर्चा

बताया जा रहा है कि चालक को कुछ घंटों तक थाने में बैठाकर रखा गया। इसी दौरान वाहन मालिक की ओर से विभिन्न लोगों के माध्यम से फोन कॉल किए जाने की चर्चा है। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि अंततः मामला कथित तौर पर 15 हजार रुपये के लेनदेन पर सुलझा और चालक को छोड़ दिया गया।

हालांकि इस कथित लेनदेन की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गंभीर प्रशासनिक प्रश्न खड़े करते हैं। वहीं, पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

कई सवालों के घेरे में मामला

थाने से वाहन भगाने की कोशिश करने वाले चालक को किस आधार पर छोड़ा गया?

क्या उसके खिलाफ कोई अतिरिक्त प्रकरण दर्ज किया गया?

यदि लेनदेन हुआ, तो उसकी जांच कौन करेगा?

क्या अवैध रेत परिवहन के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई की विश्वसनीयता पर इससे असर पड़ेगा?

जनता का विश्वास डगमगाया

अवैध रेत उत्खनन के विरुद्ध की गई कड़ी कार्रवाई से जहां एक ओर प्रशासन की सख्ती का संदेश गया, वहीं इस कथित घटना ने जनता के मन में संदेह उत्पन्न कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि थाने के सामने इस प्रकार की लापरवाही या कथित लेनदेन की घटना होती है, तो इससे कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।

अब सबकी निगाहें पुलिस प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संभावित जांच पर टिकी हुई हैं। यदि आरोप निराधार हैं तो स्पष्टिकरण आवश्यक है, और यदि तथ्यात्मक हैं तो पारदर्शी जांच एवं जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग उठना तय है।


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