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बनाहिल में पहली बार भव्य रावण दहन उत्सव: उमड़ा जनसैलाब

मांदर की थाप पर निकली श्रीराम-लक्ष्मण और हनुमान की शोभायात्रा

गाजे-बाजे और आतिशबाजी के बीच हुआ रावण दहन

महिलाओं, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की रही उत्साहपूर्ण भागीदारी: साउंड सिस्टम की दिखी लचर व्यवस्था

बनाहिल/अकलतरा। असत्य पर सत्य की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने वाले दशहरा पर्व पर जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बनाहिल में पहली बार रावण दहन उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। गांव में आयोजित इस उत्सव को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। गाजे-बाजे, पटाखों और धार्मिक उल्लास के बीच आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी। महिलाओं, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की उल्लेखनीय भागीदारी ने आयोजन को उत्सवमय बना दिया।


मांदर की थाप पर निकली भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान की यात्रा

दशहरा उत्सव का प्रमुख आकर्षण कीर्तन मंडली की ओर से निकाली गई भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान की यात्रा रही। मांदर की थाप और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच निकली इस यात्रा ने ग्रामीण परिवेश में धार्मिक और सांस्कृतिक रंग भर दिया। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान के स्वरूपों की उपस्थिति ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। यात्रा के दौरान लोगों में उत्साह और भक्ति का माहौल रहा।

पहली बार आयोजन, ग्रामीणों में दिखा जबरदस्त उत्साह

ग्राम बनाहिल में पहली बार आयोजित रावण दहन उत्सव ग्रामीणों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कार्यक्रम में आसपास के क्षेत्र के लोगों की भी सहभागिता देखने को मिली। दशहरा पर्व की परंपरा के अनुरूप रावण दहन को देखने के लिए लोग उत्सुक नजर आए। गाजे-बाजे और पटाखों के बीच हुए आयोजन ने गांव में मेले जैसा माहौल बना दिया।

रावण दहन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समाज को अहंकार, अन्याय और बुराई के अंत का संदेश देने वाला पर्व भी है। इसी भावना के साथ ग्रामीणों ने उत्सव में हिस्सा लिया। बच्चों के चेहरे पर उत्साह, युवाओं में उमंग और बुजुर्गों में पर्व को लेकर उल्लास साफ दिखाई दिया।

उत्साह के बीच साउंड सिस्टम की कमी खली

आयोजन में लोगों की भारी उपस्थिति और धार्मिक उत्साह के बावजूद साउंड सिस्टम की व्यवस्था अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। कार्यक्रम में पहुंचे कई लोगों को डीजे साउंड और बेहतर ध्वनि व्यवस्था की उम्मीद थी, लेकिन कमजोर साउंड सिस्टम के कारण उत्सव का यह पक्ष कुछ फीका नजर आया। बड़े आयोजन में ध्वनि व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है, ताकि कार्यक्रम की घोषणाएं, भजन और अन्य प्रस्तुतियां दूर तक मौजूद लोगों तक स्पष्ट रूप से पहुंच सकें।

हालांकि, साउंड सिस्टम की कमी के बावजूद लोगों के उत्साह में खास कमी नहीं दिखी और ग्रामीणों ने दशहरा उत्सव का आनंद लिया।

परंपरा और सामूहिक सहभागिता का संदेश

बनाहिल में पहली बार आयोजित रावण दहन उत्सव ने गांव में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को लेकर नई पहल का अनुभव कराया। मांदर की थाप पर निकली धार्मिक यात्रा, ग्रामीणों की भागीदारी और रावण दहन के आयोजन ने दशहरा पर्व की परंपरा को जीवंत किया। आयोजन से यह संदेश भी सामने आया कि सामूहिक प्रयास और जनभागीदारी से गांवों में धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सवों को भव्य स्वरूप दिया जा सकता है।

कुल मिलाकर, बनाहिल का पहला रावण दहन उत्सव जनभागीदारी और धार्मिक उल्लास के लिहाज से आकर्षण का केंद्र रहा। वहीं, आगामी आयोजनों में साउंड सिस्टम सहित अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाए, तो ऐसे कार्यक्रम और अधिक प्रभावशाली बन सकते हैं।


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