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जांजगीर-चांपा में माइनिंग इंस्पेक्टर के कार्यप्रणाली पर उठे रहे सवाल


अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन पर पारदर्शिता की दरकार

जांजगीर-चांपा। जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच माइनिंग इंस्पेक्टर आर.एल. राजपूत (रेखा लाल राजपूत) की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। एक ओर जहां प्रशासन अवैध खनन पर सख्ती का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर हो रही कार्रवाई की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर लगातार संदेह जताया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध खनिज उत्खनन लंबे समय से जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब मौके पर अवैध उत्खनन या परिवहन की सूचना देकर संबंधित अधिकारी RL राजपूत से संपर्क करने का प्रयास किया जाता है, तब अक्सर फोन रिसीव नहीं किया जाता। इससे यह सवाल उठता है कि क्या कार्रवाई केवल चुनिंदा मामलों तक सीमित है या फिर शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

इतना ही नहीं, माइनिंग इंस्पेक्टर के व्यवहार को लेकर भी असंतोष सामने आ रहा है। कई लोगों का कहना है कि उनका रवैया लचीला और असहयोगात्मक रहता है, जिससे आम नागरिकों और शिकायतकर्ताओं में असहजता का माहौल बनता है।

सबसे गंभीर आरोप अवैध परिवहन के मामलों में कथित “सेटलमेंट” को लेकर सामने आए हैं। सूत्रों का दावा है कि हाल ही में एक हाइवा वाहन अवैध खनिज परिवहन करते पकड़ा जाता है, जिसे बाद में कथित रूप से लेनदेन के आधार पर छोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि वाहन मालिक द्वारा संपर्क करने के बाद मामला आपसी समझौते से निपटा लिया गया। बताया जा रहा है कि हाइवा मालिक अकलतरा क्षेत्र के मुड़पार का है जो अवैध रेत का परिवहन करते हालही में पकड़ा गया था, हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस तरह के आरोपों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारों का कहना है कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह न केवल शासन के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि अवैध खनन को बढ़ावा देने जैसा भी है। ऐसे में जरूरत है कि उच्च अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं और सच्चाई सामने लाएं।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक सज्जनों का कहना है कि जिले में खनिज विभाग की कार्रवाई को पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार को सख्ती से रोका जाए।

फिलहाल, यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते ऐसे गंभीर आरोपों की जांच नहीं हुई, तो इससे विभाग की साख पर गहरा असर पड़ सकता है।


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