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कागजात चेहरे पर मारे, कुर्सी समेत धक्का देने का आरोप!नरियरा नगर पंचायत में उप-अभियंता से कथित दुर्व्यवहार पर मचा बवाल

पार्षद आकाश सिंह पर उठ रहे सवाल

नरियरा नगर पंचायत में शर्मनाक बवाल! उप-अभियंता से कथित गाली-गलौज और मारपीट के प्रयास का आरोप, पार्षद आकाश सिंह पर उठ रहे गंभीर सवाल

मुक्तिधाम और सड़क निर्माण की चर्चा के दौरान गरमाया माहौल, अधिकारी ने लगाया धमकी, कागजात चेहरे पर मारने और कुर्सी समेत धक्का देने का आरोप; CMO से कार्रवाई और सुरक्षा की मांग

शासकीय कार्यालय में कथित दुर्व्यवहार पर तीखे सवाल, जनप्रतिनिधियों से मर्यादा और जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा — निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की उठी मांग

जिला जांजगीर-चांपा के नरियरा नगर पंचायत में जनप्रतिनिधि और शासकीय अधिकारी के बीच विवाद का गंभीर मामला सामने आया है। नगर पंचायत के उप-अभियंता के.एन. उपाध्याय ने पार्षद आकाश सिंह सहित अन्य पार्षदों पर कार्यालय में गाली-गलौज, मारपीट की धमकी देने, कागजात चेहरे पर मारने, कुर्सी समेत धक्का देने और मारपीट का प्रयास करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटनाक्रम को लेकर नगर पंचायत में हलचल मची हुई है।

उप-अभियंता ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) को लिखित शिकायत सौंपकर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर जांजगीर-चांपा सहित संबंधित अधिकारियों को भी भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

मुक्तिधाम और सड़क निर्माण के मुद्दे पर शुरू हुई चर्चा, विवाद में बदली!

प्राप्त शिकायत के अनुसार, घटना 16 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे की है। नगर पंचायत कार्यालय में मुक्तिधाम के कार्य और कार्यालय के सामने सड़क निर्माण को लेकर बातचीत चल रही थी। इसी दौरान कथित तौर पर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई।

उप-अभियंता के.एन. उपाध्याय का आरोप है कि पार्षद आकाश सिंह सहित अन्य पार्षदों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए गाली-गलौज की और मारपीट की धमकी दी। शिकायत में कागजात चेहरे पर मारने, कुर्सी समेत धक्का देने और मारपीट का प्रयास किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

हालांकि, घटना के संबंध में फिलहाल उप-अभियंता की लिखित शिकायत ही सामने आई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

शासकीय कार्यालय में कथित दुर्व्यवहार: जनप्रतिनिधियों की मर्यादा पर गंभीर सवाल

नगर पंचायत का कार्यालय जनता की समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों के संचालन का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। यहां पदस्थ अधिकारी-कर्मचारी शासन की योजनाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े दायित्वों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में कार्यालय के भीतर किसी अधिकारी के साथ गाली-गलौज, धमकी अथवा धक्का-मुक्की किए जाने के आरोप सामने आना गंभीर चिंता का विषय है।

जनप्रतिनिधियों को विकास कार्यों की गुणवत्ता, निर्माण में देरी और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। लेकिन इन सवालों को उठाने का तरीका भी लोकतांत्रिक मर्यादा और कानून के अनुरूप होना चाहिए।

यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो यह जनप्रतिनिधि के पद की गरिमा और शासकीय कार्यालय की मर्यादा के विपरीत आचरण माना जाएगा। जनहित के मुद्दों पर चर्चा के दौरान कथित तौर पर हिंसक व्यवहार की स्थिति उत्पन्न होना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

अधिकारी ने CMO से लगाई गुहार, सुरक्षा और कार्रवाई की मांग

उप-अभियंता के.एन. उपाध्याय ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी को लिखित शिकायत देकर पूरे घटनाक्रम की जांच कराने और संबंधित लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी गुहार लगाई है।

शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर जांजगीर-चांपा सहित संबंधित अधिकारियों को भेजे जाने की बात कही गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर पंचायत प्रशासन और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं तथा शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है।

घोर निंदनीय है शासकीय कार्य में बाधा डालने वाला कोई भी दुर्व्यवहार!

लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि और शासकीय अधिकारी दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां हैं। जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे जनसमस्याओं को मजबूती से उठाएं, लेकिन साथ ही सार्वजनिक पद की गरिमा और कानून का सम्मान भी बनाए रखें।

शासकीय अधिकारी के साथ कथित गाली-गलौज, धमकी और मारपीट के प्रयास जैसी घटनाएं यदि प्रमाणित होती हैं, तो ऐसे आचरण की कड़ी निंदा की जानी चाहिए। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को उसके कार्यालय में भय अथवा दबाव के माहौल में काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

साथ ही, शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित पार्षदों का पक्ष सामने लाना भी आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और किसी के साथ अन्याय न हो।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

नरियरा नगर पंचायत में सामने आए इस विवाद ने शासकीय कार्यालयों में अधिकारियों-कर्मचारियों की सुरक्षा और जनप्रतिनिधियों के आचरण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। उप-अभियंता की शिकायत के बाद अब प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

क्या शिकायत पर जांच शुरू की जाएगी? क्या संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे? क्या उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई होगी?

इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

फिलहाल, मामला लिखित शिकायत पर आधारित है। पार्षद आकाश सिंह एवं अन्य संबंधित पार्षदों का पक्ष सामने आना बाकी है। निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने आ सकेगी।


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