.AD

जांजगीर-चांपा में रेत माफियाओं का कहर: बरबसपुर बना अवैध उत्खनन का गढ़

जांजगीर-चांपा/बरबसपुर।

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के बरबसपुर क्षेत्र में इन दिनों रेत माफियाओं का आतंक चरम पर है। प्रशासनिक नियमों और खनिज विभाग के निर्देशों को खुलेआम चुनौती देते हुए यहां बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन किया जा रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि आवंटित खदान क्षेत्र की सीमाओं को पार कर सैकड़ों मीटर दूर तक नदी और आसपास के इलाकों में अंधाधुंध खुदाई की जा रही है।



तस्वीरों और वीडियो में उजागर हो रही सच्चाई

हाल ही में सामने आए वीडियो और तस्वीरें इस पूरे अवैध कारोबार की असलियत बयां कर रही हैं।

भारी मशीनों का इस्तेमाल: पोकलेन और जेसीबी जैसी मशीनों से दिन-दहाड़े बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है।

ट्रांसपोर्ट नेटवर्क सक्रिय: मौके पर ट्रकों और हाइवा (डंपर) की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं, जो लगातार रेत का परिवहन कर रही हैं।

संगठित नेटवर्क का संकेत: यह गतिविधि किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित गिरोह की ओर इशारा करती है।


नियमों की खुली अनदेखी

खनिज विभाग द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, रेत उत्खनन केवल तय सीमा के भीतर ही किया जाना चाहिए। लेकिन बरबसपुर में माफियाओं ने इन नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है।

आवंटित क्षेत्र से बाहर सैकड़ों मीटर तक खुदाई

नदी के प्राकृतिक स्वरूप के साथ छेड़छाड़

बिना किसी वैध अनुमति के मशीनों का उपयोग

यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत खतरनाक है।

पर्यावरण और राजस्व पर दोहरी मार

इस अंधाधुंध उत्खनन का असर सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है—

जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित: नदी की धारा, जलस्तर और जीव-जंतुओं पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

कटाव और भू-संरचना में बदलाव: लगातार खुदाई से नदी किनारों का क्षरण बढ़ रहा है।

राजस्व का नुकसान: अवैध खनन के कारण शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

दिन के उजाले में इतने बड़े पैमाने पर मशीनों और वाहनों के साथ अवैध खनन होना और प्रशासन का मौन रहना कई सवाल खड़े करता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना किसी मिलीभगत या लापरवाही के इतने बड़े स्तर पर यह काम संभव नहीं है। खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका अब जांच के घेरे में है।

जनता की मांग: सख्त कार्रवाई हो

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है—

खदान क्षेत्र का सीमांकन (Demarcation) कराया जाए

अवैध रूप से उत्खनन किए गए स्थानों की निष्पक्ष जांच हो

दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए

अवैध परिवहन में शामिल वाहनों की जब्ती हो

आगे क्या?

अब नजरें जिला प्रशासन और खनिज विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या इस मामले में सख्त कदम उठाए जाएंगे या फिर यह अवैध कारोबार यूं ही चलता रहेगा—यह आने वाला समय ही बताएगा।



Related Articles