तरोद बस स्टैंड की खराब सड़कों की दुर्दशा पर जिम्मेदारों को नहीं कोई सरोकार
कलेक्टर के आदेशों की उड़ रही धज्जियां

जांजगीर-चांपा।
जिले के अकलतरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम तरोद का मुख्य बस स्टैंड इन दिनों बदहाली का शिकार बना हुआ है। वर्षों से उपेक्षित पड़ी सड़कें अब ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या और खतरे का कारण बन चुकी हैं। हैरानी की बात यह है कि जिला कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे द्वारा कई बैठकों में खराब सड़कों की शीघ्र मरम्मत के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
तरोद मुख्य बस स्टैंड की सड़कें बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। दिनभर बसों, ट्रैक्टरों, दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क से उड़ने वाली धूल ने पूरे गांव को धूल-धूसरित कर दिया है। इससे ग्रामीणों को सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, वहीं यात्रियों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में यही गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे सड़क का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है और आए दिन वाहन फंसने या पलटने की घटनाएं होती रहती हैं। वहीं वर्तमान में सूखे मौसम में गड्ढों के कारण वाहनों की विपरीत दिशा में आवाजाही हो रही है, जिससे किसी भी समय गंभीर दुर्घटना की स्थिति बन जाती है।
बस स्टैंड क्षेत्र में स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं रोजाना जान जोखिम में डालकर सड़क पार करने को मजबूर हैं। कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आश्वासन के सिवाय अब तक कुछ भी हासिल नहीं हुआ।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर खासा रोष है कि जब स्वयं जिला कलेक्टर द्वारा निर्देश दिए जा चुके हैं, तो फिर संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी उन आदेशों का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं। लोगों की मांग है कि तरोद बस स्टैंड की सड़कों की तत्काल मरम्मत कराई जाए, गड्ढों को भरा जाए और धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव या पक्की सड़क का निर्माण किया जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी संवेदनशीलता से लेता है और कब तक तरोद के ग्रामीणों को बदहाल सड़कों से निजात मिल पाती है, या फिर कलेक्टर के आदेश कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।








