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जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अकलतरा में अफसरशाही हावी, किसानों की समस्याएं बढ़ीं

बैंक कर्मचारियों के दुर्व्यवहार और अव्यवस्था से किसान परेशान

अकलतरा।

जांजगीर जिले के अकलतरा में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, अकलतरा शाखा में व्याप्त अव्यवस्थाओं और अफसरशाही रवैये के चलते क्षेत्र के किसान गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि बैंक की कार्यप्रणाली पूरी तरह से मनमानी पर आधारित हो चुकी है, जिससे उन्हें समय पर सरलतम बैंकिंग सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार किसानों की बदहाली के कई कारण सामने आए हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं—बैंक में लंबी-लंबी कतारें, मात्र 25 हजार रुपये की सीमित ऋण सीमा, कर्मचारियों द्वारा किया जाने वाला दुर्व्यवहार, शाखा प्रबंधक की मनमानी कार्यशैली तथा बैंक सुपरवाइजर रामप्रताप कुर्रे का कोरबा से देर से आना-जाना करना। बताया जा रहा है कि निरीक्षण की प्रक्रिया भी बेहद कमजोर है, जिससे कर्मचारियों पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं रह गया है।

किसानों का कहना है कि सुबह से शाम तक बैंक के चक्कर काटने के बाद भी उनका काम नहीं हो पाता। कई बार जरूरी दस्तावेज पूरे होने के बावजूद उन्हें टाल दिया जाता है। बैंक कर्मचारियों द्वारा अपमानजनक व्यवहार किए जाने से किसान खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। सीमित ऋण राशि के कारण खेती-किसानी के कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर होती जा रही है।

गौरतलब है कि अभी हाल ही में अकलतरा के सहकारी बैंक के अंतर्गत अमोरा का मामला सामने आया था जिसमें एक किसान का बिना ऋण लिए ही उनका पैसा काट दिया गया, वही किसान जब अपनी समस्या लेकर बैंक मैनेजर के पास पहुंची तो वहीं बैंकों की पुरानी आदत जिसमें ग्राहक को उस काउंटर से उस काउंटर का गेम खेलना शुरू हुआ। बता दें कि मामले की गुहार पीड़ित किसान के द्वारा जिले के माननीय कलेक्टर जन्मेजय महोबे जी से भी की गई है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस अकलतरा नगर में यह बैंक संचालित हो रहा है, वहीं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की उपाध्यक्ष श्रीमती रजनी साहू का गृह नगर भी स्थित है। इसके बावजूद किसानों का आरोप है कि उनकी समस्याओं की ओर न तो बैंक प्रबंधन का ध्यान जा रहा है और न ही जनप्रतिनिधियों का।

क्षेत्र के किसानों ने मांग की है कि बैंक की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए, कर्मचारियों के व्यवहार में सुधार हो तथा नियमित और प्रभावी निरीक्षण की व्यवस्था की जाए। किसानों का यह भी कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

अब देखना यह है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक का उच्च प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारी किसानों की इन गंभीर समस्याओं को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक उन्हें राहत मिल पाती है।


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