17 वर्षों की समर्पित शिक्षकीय यात्रा पूर्ण : विष्णु शर्मा ने साझा किए संघर्ष, प्रेरणा और सफलता के संस्मरण

डूमरतराई/बिलाईगढ़। शिक्षा के क्षेत्र में निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ 17 वर्षों की सतत सेवा पूर्ण करने पर शिक्षक विष्णु शर्मा ने अपने शिक्षकीय जीवन की प्रेरणादायक यात्रा को भावुक शब्दों में साझा किया। 28 फरवरी 2009 को उनकी प्रथम नियुक्ति शिक्षाकर्मी के रूप में शासकीय प्राथमिक शाला, कोरकोटी (बिलाईगढ़) में हुई थी। आज 17 वर्ष पूर्ण होने पर उन्होंने इसे आत्ममंथन, कृतज्ञता और संकल्प का महत्वपूर्ण अवसर बताया।
ग्रामीण अंचल से प्रारंभ हुई सेवा यात्रा
राजधानी में पले-बढ़े एक युवक के लिए ग्रामीण अंचल में पदस्थापना प्रारंभ में चुनौतीपूर्ण अवश्य रही, किंतु कोरकोटी के ग्रामीणों, सहकर्मी शिक्षकों और विद्यार्थियों के स्नेह ने हर कठिनाई को सरल बना दिया। इसी आत्मीय वातावरण में उन्होंने सात वर्षों तक सफलतापूर्वक अपनी सेवाएँ प्रदान कीं और शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत आधार स्थापित किया।
प्रेरणा का स्रोत बना परिवार
विष्णु शर्मा ने अपने शिक्षक बनने का श्रेय सर्वप्रथम अपने पूज्य चाचा श्री ईश्वरी प्रसाद शर्मा (व्याख्याता) को दिया, जिन्होंने उन्हें शिक्षक बनने के लिए प्रेरित किया और आवेदन प्रक्रिया में मार्गदर्शन प्रदान किया। जॉइनिंग तिथि की जानकारी समय पर मिलने में श्री रोहित साहू (बिलाईगढ़) का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके पिताश्री ने स्वयं साथ जाकर पदस्थापना स्थल का चयन करवाया, जो उनके जीवन की अमूल्य स्मृति है।
उन्होंने बताया कि परिवार में शिक्षा का वातावरण सदैव से रहा है। बड़े पिताजी श्री आत्माराम शर्मा, पिताजी डॉ. रामानुज शर्मा (आर.एस.यू.), चाचा डॉ. दानी प्रसाद शर्मा, श्रीमती गिरिजा शर्मा, श्री ईश्वरी प्रसाद शर्मा तथा बड़े भाई श्री लोकेश शर्मा एवं श्री गजेंद्र शर्मा सभी शिक्षण कार्य से जुड़े हैं। चारों भाई-बहन शासकीय शिक्षक हैं, जो परिवार के संस्कार और परिश्रम का परिणाम है।
विभिन्न विद्यालयों में दी उत्कृष्ट सेवाएँ
वर्ष 2015 से 2019 तक वे शासकीय प्राथमिक शाला, बालसमुंद (जिला बेमेतरा) में पदस्थ रहे, जहाँ उन्हें विद्यार्थियों और ग्रामवासियों का भरपूर स्नेह मिला। वर्ष 2019 से वे शासकीय प्राथमिक शाला, डूमरतराई में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं और यहाँ भी शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
निष्ठा और ईमानदारी रही पहचान
विष्णु शर्मा ने कहा कि माता-पिता के आशीर्वाद, ईश्वर की कृपा और शुभचिंतकों के सहयोग से ही वे शिक्षा क्षेत्र में अपनी एक पहचान बना पाए हैं। उन्होंने अब तक पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और बेदाग सेवा देने का संकल्प निभाया है तथा भविष्य में भी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित रहने की बात कही।
सहकर्मियों का जताया आभार
अपने शिक्षकीय जीवन की इस उपलब्धि पर उन्होंने अपने सहयोगी शिक्षकों— बी.आर. पटेल, अक्षय पटेल, प्रमोद दास, वर्मा सर, पाठकर सर, मनहरे सर, नेमराज साहू, प्रवीण शर्मा, रवि साहू, दीपक सिंह, के.सी. साहू, नारायण देवांगन सहित समस्त शिक्षिकाओं — के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया और कहा कि सुख-दुख के हर क्षण में उनका साथ अमूल्य रहा है।
शिक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता
17 वर्षों की इस प्रेरणादायक यात्रा ने यह सिद्ध किया है कि समर्पण, परिवार के संस्कार और समाज के सहयोग से कोई भी शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। विष्णु शर्मा ने आगे भी इसी भावना से शिक्षा सेवा में निरंतर कार्य करते रहने का संकल्प व्यक्त किया।
यह 17 वर्ष केवल सेवा के नहीं, बल्कि संस्कार, संघर्ष और समर्पण की जीवंत गाथा हैं।








