किताब घोटाला और फीस बढ़ोतरी पर कार्रवाई, महंगी किताबें और फीस वृद्धि पर एक्शन, निजी स्कूलों पर गाज
अंबिकापुर के निजी स्कूलों को नोटिस, अभिभावकों की शिकायत पर एक्शन, नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर 50% जुर्माना संभव


अंबिकापुर। अंबिकापुर में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की शुरुआत कर दी है। अभिभावकों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने ओरिएंटल पब्लिक स्कूल और कार्मेल स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों संस्थानों को दो दिनों के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन द्वारा की गई प्रारंभिक जांच और हाल ही में आयोजित पालक-शिक्षक बैठक में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि संबंधित स्कूलों द्वारा एनसीईआरटी की निर्धारित पुस्तकों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें अनिवार्य रूप से चलवाई जा रही हैं, जो शासन के दिशा-निर्देशों के विपरीत है। इससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा किताबें खरीदने के लिए एक ही निर्धारित दुकान का दबाव बनाया गया। कई पालकों ने बताया कि उन्हें पूरा बुक सेट खरीदने के लिए मजबूर किया गया, जबकि कुछ किताबों की आवश्यकता नहीं थी। इस तरह की व्यवस्था न केवल पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिक हितों के हावी होने का भी संकेत देती है। इसके अलावा सत्र 2026–27 के लिए फीस में 9 प्रतिशत से लेकर 13 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की शिकायतें भी सामने आई हैं। अभिभावकों का कहना है कि बिना किसी ठोस कारण के फीस में वृद्धि की गई है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल होता जा रहा है। वहीं, बच्चों पर अत्यधिक होमवर्क और मानसिक दबाव डालने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिसे लेकर अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित स्कूलों पर वसूली गई कुल फीस का 50 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही स्कूल प्रबंधन से निजी प्रकाशकों की किताबों से संबंधित दस्तावेज, फीस संरचना का पूरा विवरण और स्कूल प्रबंधन समिति के गठन से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले के अन्य निजी स्कूलों में भी हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा एक सेवा है, इसे व्यवसाय बनाने की कोशिशों पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अभिभावकों में उम्मीद जगी है कि प्रशासन की सख्ती से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण तथा किफायती शिक्षा मिल सकेगी।








