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अशासकीय विद्यालय संचालक संघ ने उठाई मांगें, कॉरपोरेट स्कूलों के रवैये का किया विरोध

छत्तीसगढ़ में अशासकीय विद्यालयों की विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर प्रदेशभर में संचालित जिला संगठनों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की है। इसी क्रम में मई 2025 में प्रदेश के अधिकांश जिला संगठनों द्वारा मिलकर छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ का गठन एवं पंजीयन कराया गया, ताकि संगठित रूप से शासन के समक्ष समस्याएं रखी जा सकें।

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि बीते 8-9 वर्षों से जिला स्तर पर लगातार धरना, रैली और प्रदर्शन के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यानाकर्षण कराया जाता रहा है। अब प्रदेश स्तरीय संगठन बनने के बाद मांगों को और अधिक मजबूती से उठाया जा रहा है।

प्रमुख मांगें

संघ ने RTE (शिक्षा का अधिकार) से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें सत्र समाप्ति के साथ ही प्रतिपूर्ति राशि का समय पर और पूर्ण भुगतान, प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि, 25% सीटों पर प्रवेश का प्रावधान, यूनिफॉर्म राशि बढ़ाने, सरस्वती साइकिल योजना का लाभ देने और नर्सरी स्तर से ही RTE प्रवेश शुरू करने जैसी मांगें शामिल हैं।

इसके अलावा, शैक्षणिक कैलेंडर समय पर जारी करने, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों की समय पर उपलब्धता, 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षा में फेल प्रावधान लागू करने, मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाने तथा शिक्षकों को प्रशिक्षण और D.Ed/B.Ed दूरस्थ माध्यम से उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई है।

संघ ने यह भी कहा कि स्कूल बसों की फिटनेस अवधि 12 वर्ष से बढ़ाकर 17 वर्ष की जाए और पूरे प्रदेश के लिए परमिट जारी किया जाए।

शासन से लगातार संवाद

संघ के अनुसार, उनकी समस्याओं को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से कई बार मुलाकात हो चुकी है। साथ ही विभागीय अधिकारियों से भी लगातार चर्चा जारी है और सभी विषयों पर सकारात्मक संवाद हुआ है। संघ को उम्मीद है कि जल्द ही इन मांगों पर निर्णय लिया जाएगा।

कॉरपोरेट स्कूलों पर आरोप

संघ ने कुछ कॉरपोरेट स्कूल समूहों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे लगातार भ्रामक बयान जारी कर अशासकीय विद्यालयों की छवि खराब कर रहे हैं। आरोप है कि ये समूह कभी निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का विरोध करते हैं, तो कभी 5वीं-8वीं बोर्ड परीक्षा को रोकने का प्रयास करते हैं और यहां तक कि RTE के तहत प्रवेश न देने जैसी घोषणाएं भी करते हैं।

संघ ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के अधिकांश अशासकीय विद्यालय (कॉरपोरेट समूहों को छोड़कर) शासन के सभी नियमों का पालन कर रहे हैं और शिक्षा को सेवा के रूप में चला रहे हैं, न कि व्यवसाय के रूप में।

सख्त कार्रवाई की मांग

संघ ने शासन से मांग की है कि शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाले और गलत जानकारी फैलाने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी कहा कि अशासकीय विद्यालयों की तुलना कॉरपोरेट स्कूलों से न की जाए।

संघ ने दोहराया कि वे RTE योजना का समर्थन करते हैं और नर्सरी स्तर से प्रवेश प्रक्रिया पुनः शुरू करने के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि कुछ कॉरपोरेट समूह अपने व्यावसायिक हितों के चलते इस योजना को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


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