अकलतरा में 'पहल' संस्था का सराहनीय अभियान
पौधारोपण के साथ वर्षा जल संचयन की अनूठी पहल
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

अकलतरा। पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन की दिशा में सामाजिक सेवा संस्था 'पहल' ने एक बार फिर प्रेरणादायी पहल करते हुए अपने वार्षिक अभियान का शुभारंभ कर दिया है। संस्था द्वारा अकलतरा नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पौधारोपण और वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए हरित एवं जल-संपन्न वातावरण तैयार करना है।
हरित अकलतरा की ओर बढ़ते कदम
संस्था ने इस वर्ष पौधारोपण अभियान की शुरुआत हाईवे रेस्टोरेंट के समीप से की। इसके बाद खटोला नहर स्थित महल के संरक्षक अशोक राठी के परिसर के समीप लगभग 25 से 30 फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। लगाए गए पौधों में पीपल, नीम, शीशम और गुलमोहर जैसी प्रजातियां शामिल हैं, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ लोगों को छाया, स्वच्छ वायु और जैव विविधता का लाभ प्रदान करेंगी।
संस्था के सदस्यों ने पौधारोपण के दौरान लोगों से इन पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का भी आह्वान किया।
"वृक्षो रक्षति रक्षितः"
अर्थात जो व्यक्ति वृक्षों की रक्षा करता है, वृक्ष भी उसकी रक्षा करते हैं।
जल संकट से मिली सीख, अब वर्षा जल संचयन पर विशेष जोर
बीते ग्रीष्मकाल में अकलतरा नगर को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ा था। इसी अनुभव से प्रेरणा लेते हुए संस्था 'पहल' ने इस वर्ष वर्षा जल संचयन अभियान प्रारंभ किया है।
इस अभियान के तहत पहला रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम दीनदयाल अग्रवाल के परिसर में स्थापित किया गया है। संस्था का उद्देश्य वर्षा के जल को व्यर्थ बहने से रोककर सीधे भूजल स्तर बढ़ाने में उपयोग करना है, ताकि भविष्य में जल संकट की स्थिति को काफी हद तक कम किया जा सके।
क्यों जरूरी है वर्षा जल संचयन?
संस्था ने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर बताया कि सामान्य धारणा के विपरीत केवल बारिश होने से भूजल स्तर स्वतः नहीं बढ़ता।
बारिश का अधिकांश पानी सतह पर बह जाता है अथवा धूप के कारण वाष्पित हो जाता है। वहीं यदि लंबे समय तक पानी खेतों में जमा रहता है तो 'लीचिंग' की प्रक्रिया के कारण मिट्टी के आवश्यक पोषक तत्व नीचे चले जाते हैं और भूजल प्रदूषित होने की आशंका भी बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार घरों एवं भवनों की छतों से एकत्रित वर्षा जल को पाइपलाइन के माध्यम से सीधे भूमि के भीतर भेजना भूजल रिचार्ज का सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय है।
कम लागत में तैयार हुआ प्रभावी हार्वेस्टिंग सिस्टम
'पहल' संस्था द्वारा तैयार किया गया वर्षा जल संचयन मॉडल सरल, व्यावहारिक और कम खर्चीला है।
इस प्रणाली के तहत लगभग 10 फीट गहरा गड्ढा तैयार किया गया, जिसके निचले हिस्से में रेत, भूसा और लकड़ी का बुरादा भरा गया। इसके ऊपर छिद्रयुक्त प्लास्टिक ड्रम लगाया गया, जिसमें रेत, ईंट के टुकड़े, कोयला और भूसा जैसी प्राकृतिक फिल्टर सामग्री का उपयोग किया गया है।
भवन की छत से आने वाला वर्षा जल पाइप के माध्यम से इस फिल्टर प्रणाली में प्रवेश करता है, जहां शुद्ध होने के बाद यह 8 से 10 फीट नीचे भूमि में समाहित होकर भूजल स्तर बढ़ाने में सहायक बनता है।
जनभागीदारी से ही सफल होगा अभियान
संस्था 'पहल' ने नगरवासियों से अपील की है कि वे अपने घरों, संस्थानों एवं व्यावसायिक परिसरों में वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करें और प्रत्येक वर्ष कम से कम एक पौधा अवश्य लगाकर उसकी देखभाल करें।
संस्था का मानना है कि यदि प्रत्येक नागरिक जल संरक्षण और पौधारोपण को अपनी जिम्मेदारी समझे, तो आने वाले वर्षों में जल संकट और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
"आपो हि ष्ठा मयोभुवस्ता न ऊर्जे दधातन। महे रणाय चक्षसे॥"
अर्थात जल जीवन, ऊर्जा और समृद्धि का आधार है तथा पृथ्वी को जीवंत बनाए रखने का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायी पहल
'पहल' संस्था का यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास है। यदि इस प्रकार के अभियान जनआंदोलन का रूप लेते हैं, तो अकलतरा ही नहीं बल्कि पूरा क्षेत्र हरित, स्वच्छ और जल-संपन्न बन सकता है।
"जल है तो कल है" केवल एक नारा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। आज जल संरक्षण और पौधारोपण की दिशा में उठाया गया प्रत्येक कदम कल की सबसे बड़ी पूंजी साबित होगा।








