बीईओ कार्यालय पामगढ़ में पुरुषोत्तम यादव एवं बाबूलाल पूतेन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
शिक्षकों से वसूली का खेल उजागर
शिक्षामंत्री तक पहुंची शिकायत, जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

जांजगीर-चांपा। जिले के विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पामगढ़ में पदस्थ कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। कार्यालय में पदस्थ पुरुषोत्तम यादव एवं बाबूलाल पूतेन (सहायक ग्रेड-3) के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार, अवैध वसूली एवं शिक्षकों से पैसों की मांग को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।
यह शिकायत भारतीय जनता युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष आकाश सिंह एवं जनपद पंचायत सदस्य पामगढ़ श्रीमती कमला बाई कौशिक द्वारा सीधे शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव से की गई है, जिसके बाद मामला राजनीतिक एवं प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्यालय में आरटीई, सेवा संबंधी फाइलों तथा विशेषकर रिटायरमेंट मामलों के निराकरण के नाम पर शिक्षकों से पैसे की मांग की जाती रही है। सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से चल रहे इस कथित भ्रष्टाचार के खेल में रिटायरमेंट से जुड़े मामलों में दो से तीन लाख रुपये तक रिश्वत लेने की बातें सामने आ रही हैं।
यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक कार्यालय का मामला नहीं बल्कि जिले की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त उस गहरी समस्या की ओर संकेत करता है, जहां कई विकासखंड एवं संकुल कार्यालयों में पदस्थ बाबुओं पर वर्षों से मनमानी, प्रभाव और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि विभाग में लंबे समय से जमे कुछ कर्मचारियों की कार्यशैली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन प्रभाव और नेटवर्क के कारण कार्रवाई अक्सर कागजों तक ही सीमित रह जाती है। ऐसे में इस शिकायत को शिक्षा विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जांच के आदेश जारी किए गए हैं। जांच अधिकारियों के रूप में मुलमुला स्कूल के प्राचार्य एवं कुटीघाट स्कूल की प्राचार्य आभा देशपांडे को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो सोमवार को जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
अब पूरे मामले में शिक्षकों, कर्मचारियों एवं आम लोगों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। पीड़ित पक्ष को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बड़ा सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि यदि वर्षों से भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं, तो विभागीय स्तर पर समय रहते कठोर कदम क्यों नहीं उठाए गए? क्या यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित है, या फिर जिले की शिक्षा व्यवस्था में फैले व्यापक तंत्र की एक झलक?
फिलहाल, सोमवार को आने वाली जांच रिपोर्ट यह तय करेगी कि आरोपों के पीछे कितना सच है और क्या शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार पर वास्तव में लगाम लग पाएगी।







