अध्यक्ष और सीएमओ की कार्यशैली से पिस रही जनता
विकास ठप! अकलतरा नगर पालिका में ‘बैठक युद्ध’ ने खोली अंदरूनी कलह की परतें

जांजगीर जिले के अकलतरा नगर पालिका इन दिनों विकास कार्यों से कम और विवाद, विरोध तथा अंदरूनी खींचतान से ज्यादा सुर्खियों में है। सामान्य सभा की बैठक को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सड़क पर उतर आया है। नगर पालिका कार्यालय के मुख्य गेट पर धरना, अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग और लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त होने की घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल—क्या नगर पालिका में प्रशासनिक निर्णय और परिषद की कार्यप्रणाली आमने-सामने आ चुकी है? और यदि हां, तो इसका खामियाजा आखिर अकलतरा की जनता क्यों भुगते?
मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) द्वारा अध्यक्ष के आदेश पर सामान्य सभा की बैठक पुनः आयोजित करने की सूचना जारी होते ही नगर पालिका उपाध्यक्ष दिवाकर राणा समेत 13 पार्षद खुलकर विरोध में उतर आए। पार्षदों ने नगर पालिका कार्यालय के सामने धरना शुरू कर दिया और 26 तारीख की सामान्य सभा में लिए गए निर्णयों को ही लागू करने की मांग रखी।
धरना देने वाले जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पहले से आयोजित सामान्य सभा के निर्णयों को लागू करने के बजाय उन्हें पुनः बैठक के जरिए विवादित बनाया जा रहा है। यदि परिषद की सर्वोच्च बैठक के निर्णयों पर ही सवाल और असहमति बनी रहे, तो फिर नगर संचालन की दिशा क्या होगी?
नगर विकास पीछे, टकराव आगे?
अकलतरा नगर की जनता के सामने आज असली मुद्दा यह नहीं है कि कौन सही और कौन गलत है। असली मुद्दा यह है कि नगर विकास की गाड़ी आखिर रुकी क्यों दिखाई दे रही है? आखिर अध्यक्षा की मंशा क्या है ये समझ से परे दिखाई दे रहा है।
सड़क, सफाई, पेयजल, मूलभूत नागरिक सुविधाएं और विकास कार्यों को लेकर पहले ही नागरिकों की अपेक्षाएं बढ़ी हुई हैं। ऐसे समय में परिषद अध्यक्षा, प्रशासन और पार्षदों के बीच पैदा हुआ यह टकराव नगर हित पर भारी पड़ता नजर आ रहा है।
राजनीतिक मतभेद, प्रशासनिक निर्णय और परिषद की असहमति के इस त्रिकोण में सबसे ज्यादा दबाव किस पर पड़ रहा है? जवाब सीधा है—अकलतरा की आम जनता पर।
धरना की सूचना पर प्रशासनिक अमले में हड़कंप
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी भास्कर शर्मा मौके पर पहुंचे और आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन पार्षद अपनी मांगों पर अड़े रहे। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक मुख्य नगर पालिका अधिकारी, एसडीएम और संबंधित अधिकारी मौके पर आकर चर्चा नहीं करेंगे, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा।
दोपहर करीब 12 बजे एसडीएम सुमित बघेल पहुंचे, कुछ देर बाद सीएमओ संजय सिंह भी स्थल पर पहुंचे। लंबी बातचीत, मनुहार और दबावपूर्ण माहौल के बाद लिखित आश्वासन दिए जाने पर लगभग तीन घंटे बाद धरना समाप्त हुआ।लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होते।
क्या नगर पालिका में बढ़ रही है संवादहीनता?
नगर पालिका के भीतर आखिर ऐसा क्या चल रहा है कि सामान्य सभा की बैठक तक विवादों के केंद्र में आ रही है? क्या परिषद नेतृत्व और प्रशासनिक अमले के बीच समन्वय कमजोर पड़ चुका है? क्या निर्णय प्रक्रिया टकराव की राजनीति और अधिकारों की व्याख्या में उलझती जा रही है?
यदि नगर पालिका के भीतर बार-बार ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं, तो यह केवल एक बैठक का विवाद नहीं बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली और संस्थागत तालमेल पर भी सवाल खड़ा करता है।
सबसे बड़ा प्रश्न — जनता को जवाब कौन देगा?
अकलतरा की जनता यह जानना चाहती है कि नगर पालिका में जारी इस खींचतान का अंत कब होगा? क्या अकलतरा की जनता किसी को वोट देकर नगर की जिम्मेदारी से विकास कराने पछता रही है, विकास कार्यों को गति कौन देगा? और क्या नगर हित के फैसले लगातार विवाद, विरोध और प्रशासनिक असहमति के बीच फंसते रहेंगे?
धरना खत्म हो गया, लेकिन बहस अभी बाकी है
क्योंकि जब परिषद कक्ष के विवाद सड़क तक पहुंच जाएं, तब यह सिर्फ राजनीतिक मामला नहीं रह जाता—यह सीधे नगर प्रशासन, जवाबदेही और जनता के भरोसे का सवाल बन जाता है।
गौरतलब है कि 26 मई को हुए बैठक में पालिका अध्यक्षा के द्वारा पार्षद राजकुमार सिंह एवं पार्षद विजय खांडेल को दुर्व्यवहार की जानकारी प्रस्तुत की गई थी जिसको लेकर सीएमओ के द्वारा आरोप को लिखित रूप से निराधार बताया गया।
धरना प्रदर्शन में नगर पालिका उपाध्यक्ष दिवाकर राणा सहित पार्षद सुभद्रा साहू, सुनीता सिंह, राजकुमार अग्रवाल, मुरलीधर मिश्रा, धराराज सिंह चौहान, शेख सितारा टंडन, चंद्रशेखर मिर्चनय, अभिषेक बंजारे, समिता सिन्हा, विजय खांडेल, कमलेश्वर दास वैष्णव, देवनारायण बरेठ एवं राजकुमार सिंह उपस्थित रहे।







