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प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी के आगमन से पहले कापन में बढ़ा विवाद

सामुदायिक भवन उद्घाटन को लेकर अघरिया समाज में मतभेद, विरोध-प्रदर्शन की तैयारी

अकलतरा/जांजगीर-चांपा। जिले के अकलतरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कापन में प्रस्तावित क्षेत्रीय सभा एवं अघरिया समाज के सामुदायिक भवन उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी के प्रस्तावित आगमन से पहले ही कार्यक्रम को लेकर समाज के भीतर असहमति खुलकर सामने आने लगी है। स्थानीय स्तर पर विरोध एवं धरना-प्रदर्शन की तैयारी की चर्चाएं तेज हैं, जिससे कार्यक्रम के राजनीतिक और सामाजिक मायने भी बढ़ गए हैं।

जानकारी के अनुसार, ग्राम कापन में निर्मित अघरिया समाज के सामुदायिक भवन के उद्घाटन को लेकर समाज दो पक्षों में बंटा दिखाई दे रहा है। स्थानीय अघरिया समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि उक्त सामुदायिक भवन का निर्माण क्षेत्रीय अघरिया समाज के लोगों द्वारा चंदा राशि एकत्रित कर, रसीदी व्यवस्था के माध्यम से कराया गया है। भवन निर्माण में स्थानीय समाज के लोगों की आर्थिक एवं सामाजिक भागीदारी प्रमुख रही है।

इसी मुद्दे को लेकर अब विवाद तब गहरा गया, जब भवन का उद्घाटन कार्यक्रम अखिल भारतीय अघरिया समाज के माध्यम से आयोजित कराए जाने की बात सामने आई। इस निर्णय से स्थानीय समाज के एक वर्ग में नाराजगी देखी जा रही है।

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि जब भवन स्थानीय समाज के सहयोग, परिश्रम और आर्थिक योगदान से तैयार हुआ है, तो उद्घाटन की प्रक्रिया एवं आयोजन में भी स्थानीय समाज की भूमिका प्रमुख होनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि समाज के मूल योगदानकर्ताओं की भावनाओं एवं सहभागिता को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, इसी मुद्दे को लेकर स्थानीय अघरिया समाज के कुछ सदस्यों द्वारा विरोध-प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। विरोध करने वाले पक्ष का कहना है कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरोध की नहीं, बल्कि समाज की एकता, पारदर्शिता एवं स्थानीय सम्मान से जुड़ा विषय है।

वहीं, प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी के कार्यक्रम में शामिल होने की खबर के बाद पूरे मामले ने और अधिक संवेदनशील रूप ले लिया है। प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है, ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

ग्राम कापन का यह मामला अब केवल एक उद्घाटन कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह समाज के अंदर प्रतिनिधित्व, सहभागिता और अधिकार की भावना से जुड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पक्ष आपसी संवाद से समाधान निकालते हैं या विवाद और गहराता है।

फिलहाल, प्रभारी मंत्री के आगमन से पहले कापन में माहौल चर्चा, असहमति और संभावित विरोध की हलचलों के बीच गर्माया हुआ है। समाज एवं प्रशासन की नजरें अब आगामी कार्यक्रम और उससे जुड़ी परिस्थितियों पर टिकी हुई हैं।


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