दीक्षा आरंभ कार्यक्रम के अंतिम दिवस पर, जिलाधीश ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को दिया सफलता का मंत्र
जांजगीर-चांपा। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जांजगीर-चांपा में नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए आयोजित दीक्षा आरंभ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिवस पर जिले के जिलाधीश श्री जन्मजय महोबा ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर छात्र-छात्राओं को मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनीष कुमार ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ "इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ की जय हो जय " के साथ विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि जिलाधीश श्री जन्मजय महोबा ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए अपनी शैक्षणिक यात्रा के अनुभव साझा किए तथा सफलता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।
उन्होंने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने कौशल का विकास करते हुए कृषि में उद्यमिता को अपनाना चाहिए। इसके माध्यम से वे कृषि क्षेत्र के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
जिलाधीश महोदय ने विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा के साथ-साथ पारंपरिक शिक्षा एवं पुस्तकों के महत्व से भी अवगत कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को पुस्तकालय में अधिक से अधिक समय व्यतीत करने के लिए प्रेरित किया। अपनी शैक्षणिक यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता की शुरुआत शून्य से होती है। सफलता प्राप्त करने के लिए केवल मेधावी होना आवश्यक नहीं है, बल्कि निरंतर परिश्रम करते रहना और बड़े सपने देखना आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनीष कुमार ने विद्यार्थियों को दीक्षा आरंभ कार्यक्रम के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जीवन में एक उद्देश्य स्थापित करना ही दीक्षा आरंभ का मूल उद्देश्य है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक जीवन में निर्धारित लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिमेष चंद्रवंशी ने किया, जबकि डॉ. राजीव दीक्षित ने आभार प्रदर्शन किया।









