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हिंदी के वैश्विक उत्थान का संकल्प: डॉ. संगीता बनाफर ने जांजगीर के साहित्यकारों को दी बधाई

दिल्ली में होगा अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन

जांजगीर-चांपा। हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा के गौरवपूर्ण पद पर स्थापित करने के उद्देश्य से विश्व हिंदी परिषद द्वारा व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में विश्व हिंदी परिषद की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संगीता बनाफर ने जांजगीर-चांपा जिले के नवगठित पदाधिकारियों एवं क्षेत्र के साहित्यकारों को शुभकामनाएं देते हुए हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया है।

डॉ. बनाफर ने कहा कि जांजगीर-चांपा की साहित्यिक परंपरा सदैव समृद्ध और प्रेरणादायी रही है। यहां के साहित्यकारों, कवियों और हिंदी सेवियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा से समाज को नई दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि जिले की नई ऊर्जावान टीम हिंदी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और जन-जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान है। हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना होगा। विशेष रूप से युवाओं को अपनी मातृभाषा के महत्व को समझते हुए हिंदी के प्रति गर्व की भावना विकसित करनी चाहिए।

दिल्ली में होगा भव्य अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन

प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संगीता बनाफर ने जानकारी देते हुए बताया कि विश्व हिंदी परिषद के तत्वावधान में आगामी 30 एवं 31 अक्टूबर को दिल्ली स्थित अटल स्मृति में भव्य अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में देश-विदेश के साहित्यकार, शोधकर्ता, शिक्षाविद् और हिंदी प्रेमी शामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदी को वैश्विक मंच पर मजबूत पहचान दिलाना और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान करना है। सम्मेलन के लिए विभिन्न विषयों पर शोध पत्र आमंत्रित किए गए हैं, ताकि हिंदी साहित्य, संस्कृति और भाषा विकास पर गंभीर विमर्श हो सके।

डॉ. बनाफर ने साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं हिंदी प्रेमियों से इस आयोजन में अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही हिंदी को उसका वास्तविक संवैधानिक सम्मान दिलाया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ की साहित्यिक पहचान को मिलेगी नई ऊंचाई

डॉ. बनाफर ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर देशभर में विशिष्ट पहचान रखती है। यहां की लोकभाषाएं, लोकसंस्कृति और हिंदी साहित्य समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग संगठित होकर हिंदी के प्रचार-प्रसार में योगदान दें, तो आने वाले समय में हिंदी विश्व की सबसे प्रभावशाली भाषाओं में शामिल होगी।

उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों एवं शिक्षण संस्थानों से भी हिंदी को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उनके अनुसार, हिंदी हमारी राष्ट्रीय एकता की आत्मा है और इसके सम्मान से ही देश की सांस्कृतिक विरासत और अधिक सशक्त होगी।

प्रदेश अध्यक्ष ने अंत में कहा कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और साहित्य पर गर्व महसूस हो, इसके लिए वर्तमान समय में हिंदी के संरक्षण और संवर्धन हेतु व्यापक अभियान चलाना अत्यंत आवश्यक है।


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