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जांजगीर-चांपा में शिक्षक नियुक्ति पर फर्जीवाड़े का आरोप

दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताओं का दावा: जांच की उठ रही मांग

पामगढ़ (जांजगीर-चांपा)। शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय तनौद, विकासखंड पामगढ़, जिला जांजगीर-चांपा में पदस्थ एक शिक्षक की नियुक्ति एवं शैक्षणिक दस्तावेजों को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि संबंधित शिक्षक की नियुक्ति से जुड़े अभिलेखों में कई गंभीर विसंगतियां हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक बताई जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित शिक्षक की नियुक्ति शिक्षाकर्मी वर्ग-2 (हिन्दी) के पद पर जुलाई 2010 में शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय सानीबर्रा, विकासखंड उदयपुर, जिला सरगुजा में हुई थी। इसके बाद 13 अक्टूबर 2010 को तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत उदयपुर (सरगुजा) द्वारा उनका स्थानांतरण आदेश जारी किया गया। बताया जा रहा है कि अगले ही दिन 14 अक्टूबर 2010 को संबंधित शिक्षक ने शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय तनौद, विकासखंड पामगढ़, जिला जांजगीर-चांपा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।

शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों पर उठ रहे सवाल

मामले का सबसे गंभीर पक्ष संबंधित शिक्षक के शैक्षणिक दस्तावेज बताए जा रहे हैं। आरोप है कि नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत की गई कक्षा 12वीं की अंकसूची/प्रमाण-पत्र पर तत्कालीन प्राचार्य के हस्ताक्षर ही नहीं हैं। दावा किया जा रहा है कि संबंधित विद्यालय संस्थान ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है कि प्रस्तुत दस्तावेज में आवश्यक हस्ताक्षर मौजूद नहीं हैं।

इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया है कि शिक्षक द्वारा प्रस्तुत अंकसूची में जिस विद्यालय का नाम अंकित है, उसमें भी स्पष्ट त्रुटियां दिखाई देती हैं। ऐसे में दस्तावेजों की प्रामाणिकता और नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। मामले में वास्तविक स्थिति का पता केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा कराई जाने वाली निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं होगा, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और विभागीय जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।

शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी शिक्षक की नियुक्ति फर्जी या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर हुई है, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया और यदि अनियमितता थी तो वह वर्षों तक कैसे अनदेखी रही।

निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

क्षेत्र के नागरिकों एवं शिक्षा से जुड़े लोगों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। संबंधित शिक्षक के समस्त शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों, नियुक्ति अभिलेखों, स्थानांतरण आदेशों तथा सत्यापन प्रक्रिया की बारीकी से जांच कराई जाए। यदि किसी भी स्तर पर फर्जीवाड़ा, कूटरचना या विभागीय लापरवाही सामने आती है तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

(नोट: यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों एवं लगाए गए आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही मानी जाएगी। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)


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