मकर संक्रांति पर आधारशिला शिशुमंदिर स्कूल बनाहिल में तिल-लड्डू वितरण
संस्कार और परंपरा का दिया गया संदेश

जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बनाहिल में संचालित आधारशिला शिशुमंदिर स्कूल में मकर संक्रांति का पर्व बड़े ही उत्साह, श्रद्धा और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। इस शुभ अवसर पर विद्यालय परिवार द्वारा छात्र-छात्राओं के बीच तिल-लड्डू का वितरण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के संचालक श्री संत राम कैवर्त्य ने सभी बच्चों को स्वयं तिल-लड्डू वितरित करते हुए मकर संक्रांति के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि—
“मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने का प्रतीक है। इस दिन तिल-लड्डू का वितरण केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरे जीवन मूल्य छिपे हैं।”
उन्होंने बच्चों को सरल शब्दों में तिल-लड्डू के प्रतीकात्मक अर्थ समझाते हुए बताया कि यह पर्व मिठास और विनम्रता, एकता और आपसी प्रेम, ऊर्जा और स्वास्थ्य, तथा सूर्य की तरह तेजस्वी बनने का संदेश देता है। साथ ही उन्होंने पतंग का उदाहरण देते हुए कहा कि—
“हमें पतंग की तरह अपने लक्ष्य ऊँचे रखने चाहिए, लेकिन अपनी जड़ों और संस्कारों से हमेशा जुड़े रहना चाहिए।”
इस अवसर पर विद्यालय में उत्सव का वातावरण देखने को मिला। छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह रहा और सभी ने पारंपरिक पर्व को आनंदपूर्वक मनाया। शिक्षकों ने भी बच्चों को मकर संक्रांति से जुड़ी सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षाओं के बारे में जानकारी दी।
गौरतलब है कि आधारशिला शिशुमंदिर स्कूल बनाहिल क्षेत्र में शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों के समावेश के लिए जाना जाता है। विद्यालय का उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना भी है।
मकर संक्रांति जैसे आयोजनों के माध्यम से विद्यालय बच्चों में भारतीय त्योहारों के प्रति आस्था, सामूहिकता और सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण विकसित करने का निरंतर प्रयास करता आ रहा है। कार्यक्रम प्रसन्नता, सौहार्द और संस्कारों के संदेश के साथ संपन्न हुआ।







