पुलिस के हाथ लग रहा अवैध शराब का जखीरा: अकलतरा आबकारी वृत्त की निगरानी पर उठे रहे गंभीर सवाल!
एक सप्ताह में पुलिस की बड़ी कार्रवाई ने खोली अवैध शराब के कारोबार की परतें, आबकारी विभाग को पहले से थी सूचना फिर भी रहे चुप्पी साधे
सूत्र कह रहे महीने की थी सेटिंग इसलिए कार्रवाई नहीं
एकतरफ अकलतरा पुलिस की हो रही सराहना तो वहीं दूसरी तरफ आबकारी विभाग की हो रही किरकिरी

अकलतरा। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा थाना क्षेत्र में लगातार भारी मात्रा में अवैध शराब की बरामदगी ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर अकलतरा पुलिस लगातार कार्रवाई करते हुए अवैध शराब के बड़े जखीरे तक पहुंच रही है, वहीं दूसरी ओर अकलतरा आबकारी वृत्त की ओर से अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं होने की चर्चा क्षेत्र में जोर पकड़ रही है।
बताया जा रहा है कि अकलतरा क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार को लेकर आबकारी विभाग को लंबे समय से सूचनाएं मिलने की बात सामने आ रही है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कई स्थानों पर अवैध शराब की बिक्री और भंडारण की जानकारी विभाग तक पहुंचाई गई, लेकिन इसके बावजूद बड़ी और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई। सूत्र के दावे से एक वॉट्सएप्प स्क्रीनशॉट से स्पष्ट दिखाई दे रही है कि जिला आबकारी अधिकारी एवं अकलतरा वृत्त आबकारी प्रभारी को पहले ही सूचना दी गई थी।
पुलिस की कार्रवाई से सामने आया बड़ा सवाल
अकलतरा थाना पुलिस ने पिछले करीब एक सप्ताह के दौरान अवैध शराब के मामलों में लगातार बड़ी कार्रवाई की है। इनमें भारी मात्रा में शराब की बरामदगी भी शामिल है। पुलिस की कार्रवाई से जहां अवैध शराब के कारोबार पर शिकंजा कसता नजर आ रहा है, वहीं यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि पुलिस को लगातार ऐसे मामलों की जानकारी मिल रही है और बड़े जखीरे पकड़े जा रहे हैं, तो आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था इन गतिविधियों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जिस क्षेत्र में लगातार अवैध शराब का कारोबार होने की सूचनाएं मिल रही हों, वहां आबकारी विभाग की सक्रियता भी उतनी ही दिखाई देनी चाहिए। केवल छोटी-मोटी कार्रवाई तक सीमित रहने के आरोपों ने विभाग की कार्यशैली को सवालों के घेरे में ला दिया है।
आबकारी विभाग को पहले से सूचना फिर भी कार्रवाई नहीं
सूत्रों के अनुसार, अकलतरा थाना पुलिस द्वारा हाल में जिस बड़े शराब जखीरे पर कार्रवाई की गई, उसके संबंध में कथित तौर पर पिछले करीब तीन माह से आबकारी विभाग को सूचना दिए जाने की बात कही जा रही है। यदि यह दावा सही है तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने लंबे समय तक जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद आबकारी विभाग की ओर से निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि अवैध शराब का कारोबार केवल राजस्व का नुकसान नहीं करता, बल्कि इसका सीधा असर कानून-व्यवस्था और आम लोगों, विशेषकर युवाओं पर पड़ता है।
पुलिस की सक्रियता बनाम आबकारी विभाग की निष्क्रियता की चर्चा
अकलतरा पुलिस की लगातार कार्रवाई से पुलिस की सक्रियता की चर्चा हो रही है। वहीं इसके समानांतर आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी और सवाल दोनों दिखाई दे रहे हैं।
आमजन का कहना है कि अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। आबकारी विभाग का भी अपने क्षेत्र में नियमित गश्त, सूचना तंत्र विकसित करना, अवैध भंडारण और बिक्री के ठिकानों की पहचान करना तथा नियमानुसार कार्रवाई करना महत्वपूर्ण दायित्व है।
ऐसे में पुलिस द्वारा लगातार बड़े मामलों का खुलासा किए जाने के बाद अकलतरा आबकारी वृत्त के अधिकारियों को अपनी निगरानी और सूचना तंत्र की समीक्षा करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
‘सेटिंग’ की चर्चा, लेकिन पुष्टि नहीं
इधर क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार और कथित विभागीय संरक्षण को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी सुनाई दे रही हैं। कुछ स्थानीय सूत्र इसे कथित ‘सेटिंग’ से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और बिना ठोस साक्ष्य के इसे तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
अब आबकारी विभाग से जवाब की अपेक्षा
अकलतरा क्षेत्र में लगातार अवैध शराब के बड़े मामले सामने आने के बाद अब निगाहें आबकारी विभाग पर हैं। सवाल यह है कि विभाग ने पिछले छह माह में प्राप्त कथित सूचनाओं पर क्या कार्रवाई की? कितने प्रकरण दर्ज किए गए? कितनी शराब जब्त की गई? कितने आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई हुई? और पुलिस द्वारा पकड़े जा रहे बड़े जखीरे तक आबकारी विभाग का सूचना तंत्र क्यों नहीं पहुंच पाया?
इन सवालों का जवाब अकलतरा आबकारी वृत्त की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को स्पष्ट करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।


फिलहाल पुलिस की लगातार कार्रवाई ने अवैध शराब कारोबार पर कार्रवाई की तस्वीर तो सामने रख दी है, लेकिन साथ ही अकलतरा आबकारी वृत्त की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठे सवालों का जवाब मिलना भी उतना ही जरूरी है। यदि विभाग के पास पहले से सूचनाएं थीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि सूचनाएं नहीं थीं, तो क्षेत्र में चल रहे इस कारोबार की जानकारी विभाग के सूचना तंत्र तक क्यों नहीं पहुंच सकी—इन दोनों परिस्थितियों में जवाबदेही आबकारी विभाग की ही बनती है।








