ग्राम कनाईबंद में संचालित कोयला भंडारण पर गंभीर सवाल
भूमि डायवर्जन, विकास अनुज्ञा और नक्शा अनुमोदन को लेकर उठे सवाल
18 अगस्त की जांच के बाद रिपोर्ट का इंतजार

ग्राम कनाईबंद में संचालित कोयला भंडारण पर गंभीर सवाल
भूमि डायवर्जन, विकास अनुज्ञा और नक्शा अनुमोदन को लेकर उठे सवाल; 18 अगस्त की जांच के बाद रिपोर्ट का इंतजार
जांजगीर-चांपा। ग्राम कनाईबंद में नैला रेलवे अंडरब्रिज के समीप संचालित मेसर्स मां शारदा लॉजिस्टिक्स प्रा.लि. का कोयला भंडारण अब कई गंभीर सवालों के घेरे में है। खसरा नंबर 645/5 सहित अन्य भूमि पर संचालित कोल डिपो को लेकर सामने आए दस्तावेजों में भूमि डायवर्जन, विकास अनुज्ञा, नक्शा अनुमोदन तथा नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमति को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार खनिज विभाग द्वारा 19 अगस्त 2025 को मामले में नौ बिंदुओं पर नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद सामने आए विभिन्न विभागीय दस्तावेजों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमति पर सवाल
दस्तावेजों के अनुसार ग्राम कनाईबंद निवेश क्षेत्र में शामिल है। ऐसे क्षेत्र में विकास कार्य अथवा निर्माण के लिए नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से आवश्यक अनुमति और विकास अनुज्ञा लिया जाना अनिवार्य है। आरोप है कि संबंधित क्षेत्र में कोयला भंडारण के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं, इसकी जांच जरूरी है।
दस्तावेजों में संबंधित भूमि के मार्ग के लिए आरक्षित होने की जानकारी भी सामने आने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि भूमि मार्ग के लिए आरक्षित थी, तो उसका डायवर्जन किस आधार पर किया गया और कोयला भंडारण की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत प्राप्त हुई?
1.503 हेक्टेयर की अनुमति, भंडारण क्षेत्र को लेकर संशय
मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल कोयला भंडारण के स्वीकृत क्षेत्रफल को लेकर भी है। बताया जा रहा है कि करीब 1.503 हेक्टेयर भूमि पर कोयला भंडारण की अनुमति है, जबकि मौके पर इससे अधिक क्षेत्र में भंडारण किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

यदि जांच में स्वीकृत क्षेत्रफल से अधिक भूमि पर कोयला भंडारण पाया जाता है, तो यह भूमि उपयोग और निर्धारित अनुमति की शर्तों के उल्लंघन का विषय बन सकता है। इसलिए मौके का सीमांकन और वास्तविक भंडारण क्षेत्र की माप महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तहसीलदार और राजस्व रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल
न्यायालय तहसीलदार जांजगीर के प्रतिवेदन की कंडिका क्रमांक 20 में भूमि के नगर विकास योजना के अंतर्गत किसी प्रयोजन के लिए आरक्षित होने संबंधी जानकारी दर्ज नहीं होने की बात सामने आने का दावा है। वहीं 19 जुलाई 2019 के तहसीलदार प्रतिवेदन में भी भूमि को आरक्षित नहीं बताया गया है।
दूसरी ओर नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के रिकॉर्ड में संबंधित क्षेत्र के निवेश क्षेत्र में आने और भूमि के मार्ग के लिए आरक्षित होने की बात सामने आने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में दोनों विभागों के रिकॉर्ड में जानकारी के अंतर को लेकर भी जांच की मांग उठ रही है।
राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट में विकास अनुज्ञा का उल्लेख
3 अगस्त 2019 के राजस्व निरीक्षक प्रतिवेदन में सहायक संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश जांजगीर के 26 अप्रैल 2019 के पत्र का हवाला दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसमें संबंधित खसरा भूमि पर जांजगीर विकास योजना के अनुसार कृषि एवं मार्ग उपयोग के तहत कोल भंडारण उद्योग का प्रावधान नहीं होने की बात कही गई थी।
इसी रिपोर्ट में विकास अनुज्ञा एवं नक्शा अनुमोदन उपलब्ध नहीं होने तथा स्वीकृति से पहले आवश्यक नक्शा अनुमोदन और विकास अनुज्ञा प्राप्त करने की आवश्यकता का भी उल्लेख बताया जा रहा है।

नक्शे में हेरफेर की आशंका, जांच से होगा खुलासा
मामले में नक्शे में हेरफेर अथवा वास्तविक स्थिति को दस्तावेजों में अलग तरीके से दर्शाए जाने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह तथ्य दस्तावेजों, स्वीकृत नक्शे और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान करने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
इसके साथ ही रेलवे अंडरब्रिज के समीप कोयला भंडारण और भारी वाहनों की आवाजाही को देखते हुए रेलवे से संबंधित आवश्यक अनुमतियों की स्थिति की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
18 अगस्त को जांच, अब रिपोर्ट पर नजर
मामले को लेकर संचालक, खनिज साधन संचालनालय/सीएमडीसी, नवा रायपुर में शिकायत किए जाने के बाद 18 अगस्त को जांच की कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि जांच की विस्तृत रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मौके पर वास्तविक कोयला भंडारण कितने क्षेत्र में हो रहा है, भूमि का वास्तविक उपयोग क्या है, डायवर्जन किस आधार पर किया गया, विकास अनुज्ञा एवं नक्शा अनुमोदन की स्थिति क्या है तथा नगर तथा ग्राम निवेश विभाग और अन्य संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति ली गई है या नहीं।
अंडरब्रिज के सामने भारी वाहनों की आवाजाही से सुरक्षा का सवाल
कोयला भंडारण स्थल के सामने ही रेलवे अंडरब्रिज का मुख्य मार्ग होने के कारण भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में यातायात और सड़क सुरक्षा को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। यदि कोयला परिवहन करने वाले भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क पर यातायात प्रभावित होता है, तो दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
जांच के बाद सामने आएगा वास्तविक सच
फिलहाल पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही हैं कि क्या मेसर्स मां शारदा लॉजिस्टिक्स प्रा.लि. को स्वीकृत 1.503 हेक्टेयर क्षेत्र की सीमा में ही कोयला भंडारण किया जा रहा है? क्या नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से विकास अनुज्ञा और नक्शा अनुमोदन लिया गया था? यदि भूमि मार्ग के लिए आरक्षित थी, तो उसका डायवर्जन किस आधार पर किया गया? और क्या मौके की वास्तविक स्थिति स्वीकृत नक्शे एवं राजस्व अभिलेखों से मेल खाती है?
इन सभी सवालों का जवाब अब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल संबंधित दस्तावेजों और 18 अगस्त को हुई जांच के निष्कर्ष पर सबकी नजर बनी हुई है।








