दिव्यांग से 40 पाव देशी शराब जब्ती के बाद कथित लेनदेन का आरोप
आबकारी विभाग में तैनात नगर सैनिक के कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

जांजगीर-चांपा। जिले के खोखरा धाराशिव मोड़ क्षेत्र में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार आबकारी विभाग की टीम ने एक दिव्यांग व्यक्ति को लगभग 40 पाव देशी शराब के साथ पकड़ा था। आरोप है कि आबकारी अधिनियम के तहत नियमानुसार अपराध दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने के बजाय कथित रूप से लेनदेन कर उसे छोड़ दिया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मामले में केवल आरोपी को छोड़ना ही नहीं, बल्कि जब्त की गई शराब के निपटान को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं हुईं। आरोपों के अनुसार जब्त शराब में से कुछ शराब मौके पर ही लोगों को पिलाई गई, जबकि शेष शराब नगर सेना के कुछ कर्मियों की कथित मिलीभगत से पैसों के बदले बेच दी गई। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल विभागीय लापरवाही का मामला नहीं होगा, बल्कि कानून लागू करने वाली एजेंसी की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
कई अहम सवालों के जवाब का इंतजार
पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में अनेक सवाल उठ रहे हैं। यदि वास्तव में 40 पाव देशी शराब बरामद हुई थी, तो आरोपी के विरुद्ध आबकारी अधिनियम के तहत अपराध दर्ज क्यों नहीं किया गया? जब्त शराब का पंचनामा तैयार हुआ या नहीं? जब्ती सूची बनाई गई या नहीं? क्या जब्त सामग्री को नियमानुसार मालखाने में जमा कराया गया? क्या पूरे मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई? इन सभी बिंदुओं पर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
जांच की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। लोगों ने दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
आधिकारिक पक्ष आना बाकी
फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आबकारी विभाग का पक्ष भी अभी सामने नहीं आया है। विभाग की ओर से स्पष्टीकरण या जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार मामले में संलिप्त तथाकथित नगर सैनिक के द्वारा अपनेआप को बचाने मामले का खुलासा करने वाले पत्रकार पर थाने में झूठी शिकायत की भी चर्चा हो रही है हालांकि इस बात की पुष्टि नही हुई है लेकिन विभागीय निष्पक्षता सामने आती है तो दूध का दूध पानी का पानी होना तय है।
(नोट: यह समाचार स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि शेष है तथा संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)







