जल संसाधन विभाग का कार्यालय भगवान भरोसे! एसडीओ साहब की मनमर्जी या प्रशासनिक व्यवस्था की लापरवाही?
सप्ताह में मुश्किल से एक-दो दिन कार्यालय पहुंचने का लग रहा आरोप
तीन दिनों से एसडीओ के नहीं आने की महिला चौकीदार ने की पुष्टि; कर्मचारी भी नदारद, फरियादी किसके पास लगाएं गुहार?

जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय में संचालित जल संसाधन विभाग के चांपा उपसंभागीय कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कार्यालय के अनुविभागीय अधिकारी रवि कांत कुर्रे के नियमित रूप से कार्यालय नहीं पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि एसडीओ जिला मुख्यालय से बाहर बिलासपुर में रहकर आना-जाना करते हैं और सप्ताह में मुश्किल से एक-दो दिन ही कार्यालय पहुंचते हैं। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर फोन भी नहीं उठने की बात सामने आ रही है। ऐसे में विभागीय कार्यों के लिए कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को जिम्मेदार अधिकारी से मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कार्यालय की जमीनी हकीकत जानने पर स्थिति और भी चिंताजनक नजर आई। कार्यालय में महिला चौकीदार शांति बाई रत्नाकर ने बताया कि पिछले तीन दिनों से एसडीओ साहब ड्यूटी पर नहीं आए हैं। वहीं, कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। निरीक्षण के दौरान केवल एक इंजीनियर मौजूद मिले, जिनका नाम अनुराग बताया गया, जबकि अन्य कर्मचारी कार्यालय से नदारद मिले।
आखिर किसके भरोसे चल रहा है कार्यालय?
शासकीय कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना प्रशासनिक व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी है। विशेषकर जल संसाधन विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग में ग्रामीणों, आम नागरिकों और विभिन्न निर्माण एवं सिंचाई संबंधी कार्यों से जुड़े लोगों को समय पर अधिकारी-कर्मचारियों की उपलब्धता मिलना आवश्यक है। लेकिन यदि जिम्मेदार अधिकारी ही नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित नहीं होंगे और कर्मचारी भी नदारद रहेंगे, तो आम जनता की समस्याओं का निराकरण कैसे होगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित अधिकारी को मुख्यालय में नियमित निवास और कार्यालयीन समय में उपस्थिति के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य नहीं है? यदि अधिकारी सप्ताह में एक-दो दिन ही कार्यालय पहुंच रहे हैं, तो शेष दिनों में विभागीय कामकाज और आम जनता की समस्याओं का निराकरण कौन कर रहा है?
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या विभागीय अधिकारियों को अपने अधीनस्थ कार्यालयों में उपस्थिति और कामकाज की वास्तविक स्थिति की जानकारी है? क्या कार्यालयों का नियमित निरीक्षण किया जाता है या फिर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति केवल कागजों तक सीमित है?
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्यालय की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या फिर जिम्मेदारों की कथित मनमानी इसी तरह जारी रहती है। आम जनता को समय पर शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए नियमित उपस्थिति और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।









