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साइबर ठगी के मायाजाल से बचने का मिला मंत्र: कृषि महाविद्यालय जांजगीर में साइबर प्रभारी भास्कर शर्मा ने विद्यार्थियों को किया जागरूक

डिजिटल अरेस्ट, साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, म्यूल अकाउंट इत्यादि के खतरों से कराया रूबरू

जांजगीर। वर्तमान दौर में डिजिटल तकनीक जहां लोगों के जीवन को आसान बना रही है, वहीं साइबर अपराधियों ने इसी तकनीक को ठगी का हथियार बनाकर आम नागरिकों, युवाओं और शिक्षित वर्ग को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों में जागरूकता पैदा करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। इसी उद्देश्य को लेकर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जांजगीर के डिन मनीष कुमार की अध्यक्षता में साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें जिले के साइबर प्रभारी भास्कर शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में छात्र-छात्राओं को साइबर अपराध के विभिन्न स्वरूपों, उनसे बचाव के उपायों और डिजिटल सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तृत जानकारी देकर जागरूक किया।


कार्यक्रम के दौरान साइबर प्रभारी भास्कर शर्मा ने विद्यार्थियों को साइबर ठगी, म्यूल अकाउंट, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्रॉड सहित इंटरनेट एवं सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। कभी बैंक अधिकारी बनकर फोन किया जाता है, तो कभी किसी सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी के नाम पर डराया-धमकाया जाता है। इसके अलावा फर्जी लिंक, ओटीपी, अनजान कॉल, ऑनलाइन निवेश और आकर्षक ऑफर के माध्यम से भी लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ किया जाता है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने वालों से रहें सावधान

भास्कर शर्मा ने विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को बताया कि साइबर अपराधी पुलिस, सीबीआई, ईडी अथवा अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को डराते हैं और उन्हें कथित गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर पैसे ऐंठते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को मानसिक दबाव में लेकर धनराशि वसूलना साइबर ठगी का एक गंभीर तरीका है। ऐसी किसी भी परिस्थिति में घबराने के बजाय सतर्कता बरतनी चाहिए और तत्काल संबंधित पुलिस अथवा साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए।

म्यूल अकाउंट के जरिए अपराधियों के जाल में न फंसें युवा

कार्यक्रम में म्यूल अकाउंट के विषय पर भी विशेष जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि कुछ साइबर अपराधी दूसरों के बैंक खातों का उपयोग ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए करते हैं। कई बार युवाओं को नौकरी, कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड या बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर ली जाती है। ऐसे खाते साइबर अपराध में इस्तेमाल हो सकते हैं और खाताधारक भी कानूनी मुश्किलों में फंस सकता है। इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने देना या खाते से संदिग्ध लेनदेन करना गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है।

विद्यार्थियों को दी डिजिटल सुरक्षा की महत्वपूर्ण सीख

उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे अपने मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंकिंग संबंधी जानकारियों की सुरक्षा को लेकर हमेशा सजग रहें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। ऑनलाइन लेनदेन करते समय पूरी सावधानी बरतें तथा किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी संदेश दिया कि साइबर जागरूकता केवल व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक जागरूक विद्यार्थी अपने परिवार और समाज को भी साइबर अपराधों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

शिक्षा के साथ सुरक्षा के प्रति जागरूकता की अनूठी पहल

उल्लेखनीय है कि कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जांजगीर में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और उन्हें समसामयिक चुनौतियों से अवगत कराने के उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। इसी सकारात्मक पहल की कड़ी में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जिले के साइबर प्रभारी भास्कर शर्मा ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए विद्यार्थियों को साइबर अपराध की बदलती दुनिया और उससे बचाव के व्यावहारिक तरीकों से परिचित कराया।

साइबर अपराध के विरुद्ध उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित हो चुके हैं भास्कर शर्मा

जिले में साइबर प्रभारी का दायित्व संभालने के बाद से भास्कर शर्मा द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम, साइबर जागरूकता और इस दिशा में प्रभावी पुलिसिंग के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनके कार्यों और उपलब्धियों की सराहना पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय सहित पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग द्वारा भी की जा चुकी है। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया गया है।

साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप के बीच भास्कर शर्मा द्वारा लगातार चलाए जा रहे जागरूकता प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय हैं। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार जागरूकता, सतर्कता और सही समय पर सही कदम उठाना है।

आज के डिजिटल युग में तकनीक का इस्तेमाल जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी उसके सुरक्षित उपयोग की जानकारी रखना भी है। जागरूक नागरिक ही सुरक्षित डिजिटल समाज की मजबूत नींव रख सकते हैं।


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