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25 सितंबर से 11 अक्टूबर तक गूंजेगा उपनिषद ज्ञानामृत का संदेश

पूजनीया रासेश्वरी देवीजी के प्रवचन को लेकर शिक्षकगण एवं संगठन पदाधिकारियों की हुई महत्वपूर्ण बैठक

आयोजन को भव्य एवं व्यापक बनाने पर बनी रणनीति


जांजगीर-चांपा। पूजनीया रासेश्वरी देवीजी के सानिध्य में आगामी 25 सितंबर से 11 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले ‘उपनिषद ज्ञानामृत’ प्रवचन एवं कथा श्रवण कार्यक्रम को लेकर शिक्षकगण, संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों एवं प्रबुद्धजनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन की तैयारियों, प्रचार-प्रसार, व्यवस्थाओं तथा अधिक से अधिक श्रद्धालुओं एवं समाज के विभिन्न वर्गों को कार्यक्रम से जोड़ने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान वंदना दीदी एवं कृष्णा दीदी ने उपस्थित शिक्षकगण, संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों तथा प्रबुद्धजनों को पूजनीया रासेश्वरी देवीजी के प्रवचन एवं आगामी कथा श्रवण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा, आयोजन की तैयारियों तथा इसकी व्यापकता को लेकर विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अधिक से अधिक लोगों को इस आध्यात्मिक एवं ज्ञानवर्धक आयोजन से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

उपनिषद के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर

बैठक में दिव्य उपनिषद के महत्व पर विशेष रूप से चर्चा की गई। उपस्थितजनों ने कहा कि उपनिषदों में निहित ज्ञान भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है। वर्तमान समय में नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस दौरान आगामी दिनों में बाल संस्कार शिविर आयोजित कर नौनिहाल बच्चों को संस्कार, योग एवं जीवन मूल्यों से संबंधित शिक्षा देने की बात भी कही गई। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उन्हें भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

प्रचार-प्रसार और व्यवस्थाओं को लेकर हुआ मंथन

बैठक में आयोजन के प्रचार-प्रसार, श्रद्धालुओं की सहभागिता, आवश्यक व्यवस्थाओं तथा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उपस्थित पदाधिकारियों एवं प्रबुद्धजनों ने अपने-अपने सुझाव साझा किए और आयोजन को सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि धार्मिक आयोजन केवल आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, सद्भाव, सेवा, नैतिकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

सामूहिक सहभागिता से आयोजन को व्यापक बनाने का संकल्प

बैठक में उपस्थितजनों ने कहा कि पूजनीया रासेश्वरी देवीजी के प्रवचन एवं कथा श्रवण जैसे आध्यात्मिक आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने के साथ-साथ व्यक्ति के जीवन में आत्मचिंतन, सदाचार एवं मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते हैं। ऐसे आयोजनों में समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित कर इसे व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है।

सभी उपस्थितजनों ने आगामी 25 सितंबर से 11 अक्टूबर तक होने वाले आयोजन को सफल एवं व्यापक बनाने के लिए सक्रिय सहभागिता का संकल्प लिया तथा कार्यक्रम की तैयारियों में अपना पूर्ण सहयोग देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

ये रहे उपस्थित

बैठक में मन्मथ नाथ शर्मा (सदस्य, बाल संरक्षण आयोग छत्तीसगढ़), अरुण तिवारी, अनुभव तिवारी, विक्रान्त साहू, संजय चौहान (महामंत्री बीएमएस), राघवेन्द्र शर्मा, शिवम, दिनेश, यशपाल चौबे, राहुल भार्गव, राजू जगत सहित अनेक प्रबुद्धजन, शिक्षकगण एवं संगठन से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे।

आयोजकों का कहना है कि आगामी धार्मिक आयोजन के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान, संस्कार एवं भारतीय जीवन मूल्यों का संदेश समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।



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