अकलतरा नगर पालिका में सत्ता संग्राम: अध्यक्ष दीप्ति रोहित सारथी का सीएमओ पर सीधा हमला
प्रशासनिक तंत्र कटघरे में
पालिका अध्यक्ष ने प्रेस कांफ्रेंस कर सीएमओ पर लगाए कई गंभीर आरोप

जांजगीर-चांपा।
अकलतरा नगर पालिका परिषद में सत्ता और प्रशासन के बीच टकराव अब खुलकर सड़क पर आ गया है। भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई की जयंती पर आयोजित अटल परिसर लोकार्पण कार्यक्रम नगर विकास के उत्सव के बजाय राजनीतिक बवाल में तब्दील हो गया।
नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती दीप्ति रोहित सारथी ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) संजय सिंह पर गंभीर, सुनियोजित और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े आरोप लगाते हुए प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि लोकार्पण कार्यक्रम को नियमों और परिषद की सहमति के बिना मनमाने ढंग से आयोजित किया गया और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को जानबूझकर हाशिये पर धकेला गया।

कार्यक्रम में नारेबाजी, परिषद की गरिमा तार-तार
लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान कथित अनियमितताओं के विरोध में पार्षदों द्वारा नारेबाजी की गई। हालात इतने बिगड़ गए कि मंचीय कार्यक्रम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया। परिषद सदस्यों का आरोप है कि सीएमओ संजय सिंह ने नगर पालिका को “अफसरशाही की जागीर” बना दिया है।
वायरल वीडियो से भाजपा की किरकिरी
विवाद को और हवा तब मिली जब कार्यक्रम के दौरान “छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अमर रहें” के नारों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो को लेकर भाजपा को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे सत्ता और प्रशासनिक संरक्षण की खुली मिसाल बताया जा रहा है।
प्रेस कांफ्रेंस में फूटा आक्रोश
नगर पालिका अध्यक्ष दीप्ति रोहित सारथी ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि सीएमओ संजय सिंह लगातार परिषद को नजरअंदाज कर मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो नगर पालिका परिषद में आंदोलन तथा न्यायिक प्रक्रिया के लिए बाध्य होगी नई।
जांच की मांग, प्रशासन मौन
कई पार्षदों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक कार्यक्रम की अनियमितता नहीं, बल्कि नगर पालिका में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार और अफसरशाही के अहंकार का मामला है।
अब तक सीएमओ संजय सिंह या जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
बड़ा सवाल
क्या नगर पालिका में निर्वाचित जनप्रतिनिधि सिर्फ नाम मात्र के रह गए हैं?
क्या अफसरशाही सत्ता के संरक्षण में नियमों को ताक पर रख रही है?
और क्या यह विवाद राज्य सरकार तक पहुंचेगा?
अकलतरा नगर पालिका का यह मामला अब केवल स्थानीय राजनीति नहीं रहा, बल्कि यह जनप्रतिनिधियों बनाम अफसरशाही की खुली लड़ाई बन चुका है।









