बिजली कर्मचारी महासंघ का बड़ा ऐलान: वादाखिलाफी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई
15 दिसंबर को रायगढ़ में होगी आमसभा

छत्तीसगढ़ राज्य बिजली कर्मचारी संघ महासंघ एवं उससे जुड़े सहयोगी संगठनों ने प्रबंधन की वादाखिलाफी और कथित तानाशाही रवैये के खिलाफ आंदोलन को एक बार फिर तेज करने का ऐलान किया है। महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारियों की जायज मांगों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जब तक लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
महासंघ के महामंत्री प्रमोद कुर्रे ने बताया कि कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर 9 और 10 अक्टूबर 2025 को डंगनिया मुख्यालय में विशाल धरना-प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद प्रबंधन की ओर से केवल मौखिक आश्वासन दिए गए, जिससे असंतुष्ट होकर 10 अक्टूबर 2025 से क्रमिक धरना महासंघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा शुरू किया गया।
उन्होंने बताया कि 17 अक्टूबर 2025 को प्रबंधन द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद आंदोलन को स्थगित किया गया था, लेकिन अब प्रबंधन अपने ही वादों से पीछे हटता नजर आ रहा है।
बिजली बिल छूट खत्म करने पर भड़का आक्रोश
महासंघ का आरोप है कि प्रबंधन ने कर्मचारियों और अधिकारियों को वर्षों से मिल रही बिजली बिल में छूट को अचानक समाप्त कर दिया है। इसे महासंघ ने कर्मचारियों के हितों पर सीधा हमला बताते हुए कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराया है।
महामंत्री प्रमोद कुर्रे ने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से तानाशाहीपूर्ण है और कर्मचारियों के साथ किए गए लिखित एवं मौखिक वादों का खुला उल्लंघन है।
उन्होंने दो टूक कहा—
“जब तक कर्मचारियों के पक्ष में स्पष्ट लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन किसी भी कीमत पर बंद नहीं किया जाएगा।”
15 दिसंबर को रायगढ़ में आमसभा, सौंपा जाएगा ज्ञापन
आंदोलन के अगले चरण के तहत महासंघ ने 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) को शाम 5 बजे, मुख्य अभियंता कार्यालय, रायगढ़ क्षेत्र में एक विशाल आमसभा आयोजित करने का निर्णय लिया है।
इस आमसभा के दौरान मुख्य अभियंता को पावर कंपनी के अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसके माध्यम से कर्मचारियों की एकजुटता और विरोध दर्ज कराया जाएगा।
महासंघ ने राज्य के सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों, अधिकारियों और पदाधिकारियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाएं और अपनी एकता का परिचय दें।
आंदोलन का अल्टीमेटम: वर्क टू रूल से हड़ताल तक
महासंघ ने प्रबंधन को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि 30 दिसंबर 2025 तक कर्मचारियों की मांगों पर कोई ठोस आदेश जारी नहीं किया गया, तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा।
महासंघ द्वारा घोषित आंदोलन की रूपरेखा इस प्रकार है—
🔹 1 जनवरी से 10 जनवरी 2026 तक
➡️ “वर्क टू रूल” कार्यक्रम के तहत विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
🔹 11 फरवरी 2026 से
➡️ कम बंद हड़ताल शुरू की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
एकजुटता का आह्वान
महामंत्री प्रमोद कुर्रे ने महासंघ के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों से आह्वान किया है कि 15 दिसंबर की आमसभा और ज्ञापन कार्यक्रम का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए।
उन्होंने कहा कि “एकजुटता ही कर्मचारियों की सबसे बड़ी ताकत है और इसी के बल पर हम अपने अधिकार हासिल करेंगे।”
बिजली कर्मचारी महासंघ के इस ऐलान के बाद विभागीय हलकों में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।









