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अकलतरा की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

अकलतरा बीईओ देवकांत द्विवेदी के के कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालिया निशान

जांजगीर-चांपा/अकलतरा।

अकलतरा क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार उठ रहे सवाल अब केवल शैक्षणिक गुणवत्ता तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि विद्यालयों की कार्यप्रणाली, विद्यार्थियों की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही तथा विभागीय कार्यशैली पर भी गंभीर चिंताएं सामने आने लगी हैं। हाल के घटनाक्रमों ने शिक्षा विभाग की व्यवस्था और निगरानी तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

जहां एक ओर सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित विद्यालय वातावरण और पारदर्शी प्रशासन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर अकलतरा क्षेत्र में सामने आ रहे घटनाक्रम शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं।

सूत्रों एवं स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, क्षेत्र में हाल ही में सामने आए कथित खेल शिक्षक द्वारा छात्रा से छेड़खानी के मामले ने अभिभावकों और समाज के बीच चिंता का माहौल पैदा किया। शिक्षा के मंदिर माने जाने वाले संस्थानों में यदि छात्राओं की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न खड़े होने लगें, तो यह केवल एक संस्था नहीं बल्कि पूरे तंत्र के लिए गंभीर संकेत माना जाता है।

वहीं दूसरी ओर, कुछ विद्यालयों में छोटे बच्चों से स्कूल स्टाफ द्वारा पानी भरवाने जैसे आरोप भी चर्चा का विषय बने हुए थे। यदि विद्यालय में अध्ययनरत मासूम विद्यार्थियों से ऐसे कार्य कराए जाने की बात सत्य पाई जाती है, तो यह बाल अधिकारों एवं विद्यालयीन अनुशासन दोनों के संदर्भ में गंभीर विषय हो सकता है।

इसी बीच शिक्षा विभाग के प्रशासनिक पक्ष को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से यह चर्चा है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जुड़े एक कर्मचारी, जिसके विरुद्ध पूर्व में कथित रूप से एफआईआर दर्ज होने की बात कही जा रही है, उससे संबंधित मामले में अपेक्षित विभागीय कठोरता देखने को नहीं मिली। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि संबंधित कर्मचारी को कार्रवाई के बजाय संरक्षण प्राप्त हुआ।

सूत्रों के अनुसार, यह दावा किया जा रहा है कि उस समय उक्त कर्मचारी को कथित रूप से लिलवाडीह स्थित सरकारी क्वार्टर उपलब्ध कराया गया तथा फरारी के दौरान भी उसे संरक्षण मिलने जैसी बातें सामने आ रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। यदि इन आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो यह प्रशासनिक निष्पक्षता और जवाबदेही को लेकर बड़ा प्रश्न खड़ा कर सकता है।

क्षेत्र में चर्चा है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी देवकांत द्विवेदी की कार्यशैली को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कई मामलों में अनियमितताओं के प्रति नरमी अथवा संरक्षण जैसी स्थिति दिखाई देती है। हालांकि इन आरोपों पर विभागीय पक्ष और आधिकारिक स्पष्टीकरण भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाएगा।

शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों का कहना है कि शिक्षा विभाग केवल पाठ्यक्रम संचालन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के भविष्य निर्माण की आधारशिला है। ऐसे में यदि विद्यालयों में सुरक्षा, अनुशासन, नैतिकता और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर प्रश्न उठने लगें, तो इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों, अभिभावकों और समाज के विश्वास पर पड़ता है।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि —

क्या अकलतरा क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था में सामने आ रहे मामलों की निष्पक्ष जांच होगी?

क्या जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाएगी?

क्या शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के हित और व्यवस्था सुधार को प्राथमिकता देगा?

इन सवालों के उत्तर आने वाले समय में ही स्पष्ट हो पाएंगे, लेकिन फिलहाल अकलतरा क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे मुद्दों ने जनचर्चा और प्रशासनिक बहस को तेज कर दिया है।



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