अकलतरा के समीप तरौद में संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का भव्य आयोजन

अकलतरा नगर से लगे ग्राम तरौद में इन दिनों आध्यात्मिक वातावरण से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। यहां चंदेल परिवार (डॉ. अनुराग सिंह एवं डॉ. श्रीमती प्रतिभा) द्वारा संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन व्यासपीठ से विराजमान आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतार की दिव्य कथा का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि “जब-जब धरती पर धर्म की हानि और पाप का भार बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए श्री नारायण अवतार धारण करते हैं।” उन्होंने बताया कि अट्ठाइसवें द्वापर युग में भगवान ने श्रीकृष्ण के रूप में पूर्ण अवतार लिया और अपनी अनेक लीलाओं के माध्यम से पृथ्वी से पाप का भार उतारा।
कथा के दौरान आचार्य जी ने श्रीमद् भागवत की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह ऐसी कथा है जो मृत्यु को भी मंगलमय बना देती है और इस संसार का सर्वश्रेष्ठ सत्कर्म है। यह सौभाग्य मनुष्य को उसके पुण्य कर्मों और पूर्वजों के आशीर्वाद से प्राप्त होता है।
भगवान नाम की महत्ता को स्पष्ट करते हुए आचार्य जी ने अजामिल ब्राह्मण का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि अजामिल ब्राह्मण दासी स्त्री के संसर्ग में आकर अपने ब्राह्मणत्व का नाश कर बैठा और पापमय जीवन के कारण अधोगति को प्राप्त हो रहा था। जीवन के अंतिम क्षणों में जब उसने यमदूतों को देखा तो भय के कारण अपने पुत्र नारायण को पुकारने लगा। पुत्र तो नहीं आया, किंतु बार-बार नारायण नाम लेने से भगवान नारायण ने उसकी पुकार सुन ली और अपने पार्षदों को भेजकर न केवल उसकी प्राण-रक्षा की, बल्कि उसे नर्कगमन से भी बचा लिया। आचार्य जी ने कहा कि कलयुग में भगवान नाम का स्मरण और जप ही आत्मकल्याण का सर्वोच्च साधन है।
चौथे दिन की कथा में राजा बलि और वामन भगवान का प्रसंग भी सुनाया गया। आचार्य जी ने दान की महिमा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब राजा बलि ने वामन भगवान को तीन पग भूमि दान करने का संकल्प लिया, तो भगवान ने पहले पग में स्वर्ग और दूसरे पग में संपूर्ण पृथ्वी नाप ली। तीसरे पग के लिए स्थान पूछने पर राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया और कहा—“प्रभु, अपना चरण मेरे मस्तक पर रखकर मुझे ही नाप लीजिए।”
राजा बलि के इस पूर्ण समर्पण से भगवान प्रसन्न हो गए और उन्हें चिरंजीवी होने का वरदान देते हुए सदैव रक्षा का वचन दिया।
कथा श्रवण हेतु प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित होकर दिव्य सत्संग, कथा-अमृत रसपान एवं आकर्षक जीवंत झांकियों का आनंद ले रहे हैं। यह श्रीमद् भागवत कथा स्मृतिशेष गिरधर सिंह एवं पुष्पलता सिंह की स्मृति एवं मोक्ष की पवित्र कामना से आयोजित की गई है।
कथा के यजमान डॉ. श्रीमती प्रतिभा सिंह एवं डॉ. अनुराग सिंह ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर श्रीमद् भागवत कथा श्रवण का लाभ लेने की अपील की है। आयोजन स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।







